अशासकीय शिक्षण संस्था संचालक संघ द्वारा आयोजित हुआ सेन थाम एकेडमी में शिक्षा का महाकुम्भ
देवास। अशासकीय शिक्षण संस्था संचालक संघ, देवास के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन एवं उससे जुड़ी चुनौतियों को समझने के उद्देश्य से सेन थॉम अकादमी, देवास में एक भव्य व्याख्यान एवं शिक्षण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन शिक्षा के क्षेत्र में एक “शिक्षा महाकुम्भ” के रूप में संपन्न हुआ। इस संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्तर के प्रबुद्ध शिक्षाविदों एवं चिंतकों की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी उपस्थित रहे। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलगुरु प्रो. एस. के. जैन, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलगुरु प्रो. देव आनंद हिंडोलिया, आत्मनिर्भर भारत, नई दिल्ली के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. ओमप्रकाश शर्मा, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अर्पण भारद्वाज, तथा अशासकीय शिक्षण संस्था संचालक संघ के अध्यक्ष श्री राजेश खत्री एवं सचिव दिनेश मिश्रा मंचासीन रहे। संगोष्ठी के माध्यम से देवास नगर को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों, स्वरूप एवं व्यवहारिक चुनौतियों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का सुअवसर प्राप्त हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. अतुल कोठारी ने अपने वक्तव्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह नीति वर्तमान समय की अत्यंत आवश्यक मांग है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1952 से अब तक माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के लिए तो विभिन्न आयोग गठित हुए, किंतु प्राथमिक एवं पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के लिए किसी ठोस आयोग का गठन नहीं हुआ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इस कमी को दूर करते हुए 5$3$3$4 का नवीन शैक्षणिक ढांचा प्रस्तुत किया है, जिसमें प्राथमिक एवं पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है।
उन्होंने नीति की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कक्षा पाँच तक शिक्षा मातृभाषा में तथा संभव हो तो कक्षा आठ तक मातृभाषा में दी जानी चाहिए। कक्षा छह से व्यावहारिक एवं व्यवसायिक शिक्षा तथा कक्षा नौ से कौशल विकास एवं इंटर्नशिप को अनिवार्य किया गया है। विद्यार्थियों को विषय चयन की स्वतंत्रता दी गई है, जिससे वे कला, वाणिज्य, विज्ञान, संस्कृत, अंग्रेज़ी सहित विभिन्न विषयों का चयन अपनी रुचि के अनुसार कर सकें।
डॉ. कोठारी ने कहा कि शिक्षक के लिए बी.एड. आवश्यक है, किंतु कौशल विकास जैसे विषयों के लिए संबंधित क्षेत्र के कुशल व्यक्तियों की सेवाएँ भी ली जा सकती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक बालक में कोई न कोई योग्यता होती है; आवश्यकता है उसे पहचान कर उसी दिशा में आगे बढ़ाने की। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अनेक महान खिलाड़ी एवं कलाकार औपचारिक डिग्री के बिना भी अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं। इसी विचारधारा पर आधारित राष्ट्रीय शिक्षा नीति पंचकोश की संकल्पना को केंद्र में रखती है।

उन्होंने विभिन्न जिलों में नीति के अंतर्गत किए गए प्रयोगों का उल्लेख करते हुए बताया कि झाबुआ जिले में परमार दंपति द्वारा बच्चों को कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर पद्मश्री सम्मान तक पहुँचना नीति की सफलता का सशक्त उदाहरण है। नवीन शिक्षा नीति के अंतर्गत आईआईटी एवं मेडिकल कॉलेजों में भारतीय भाषाओं में अध्ययन की शुरुआत हो चुकी है। भारतीय ज्ञान परंपरा, जैसे वैदिक गणित एवं मंत्र विज्ञान, आज विश्व के अनेक देशों में अपनाई जा रही है। उन्होंने सी. वी. रमन एवं डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों का उदाहरण देते हुए कहा कि जो स्वयं के आचरण से सिखाए, वही सच्चे आचार्य होते हैं। अन्य अतिथियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उद्बोधनों के पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से सार्थक एवं संवादात्मक चर्चा हुई। कार्यक्रम में देवास नगर के शिक्षा से जुड़े समस्त शैक्षणिक संस्थानोंकृविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं शिक्षा महाविद्यालयों के संचालक, प्राचार्य, संस्था प्रमुख तथा नगर के अनेक विशिष्ट नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सैयद मकसूद अली एवं कीर्ति चव्हाण द्वारा किया गया। स्वागत भाषण एवं संस्था की कार्ययोजना का परिचय संघ के अध्यक्ष राजेश खत्री ने प्रस्तुत किया, जबकि अतिथि परिचय सुरेंद्र राठौर द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत सेन थॉम अकादमी के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन संघ के सचिव दिनेश मिश्रा ने किया। उक्त जानकारी संस्था के मीडिया प्रभारी शकील कादरी, आदित्य दुबे एवं अबरार अहमद शैख द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान की गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में विभिन्न समितियों के सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई, जिनमें प्रमुख रूप से सुनील थॉमस, महेंद्र सिंह गहलोत, शकील शेख, स्वप्निल जैन, आर. पी. मिश्रा, सैयद मेहसर अली, अजीज कुरेशी, रवि श्रीवास्तव, सुरेश चौहान, सुरेश चव्हाण, निरंजन ठाकुर, संदीप चौरसिया, रितेश मिश्रा, शोएब शेख, भावेश अग्रवाल, आज़ाद शेख, लखन मालवीय, नारायण, सुरेश माकोड़े, विशाल शर्मा, प्रभात माचवे, सैय्यद रियाज, शिवराज सिंह चावड़ा, शाहनवाज़ अली, फारूक पठान, नीरज शर्मा, चेतन यादव, मनोज हिनोरे, राजेश गोयल, दुर्गेश यादव, खालिद कुरैशी, उस्मान शेख, अनिल शर्मा, शाहरुख पठान, भरत पटेल, सुरेंद्र राठौर, सदाकत अली, मोखिर अली, अतुल मद्धव, आदित्य खत्री, शीतल गोस्वामी, सुषमा अरोरा, सहित अन्य सहयोगी शामिल रहे। सभी के संयुक्त प्रयासों से यह आयोजन अत्यंत सफल रहा।