वालपुर के ऐतिहासिक भौंगर्या हाट में देवास के युवाओं ने जाना आदिवासी संस्कृति का वैभव
देवास। मध्य प्रदेश के राजकीय पर्व भौंगर्या की धूम इन दिनों पूरे चरम पर है। इसी क्रम में आलीराजपुर जिले के ऐतिहासिक वालपुर भौंगर्या हाट में देवास से गए युवाओं के एक दल ने शिरकत की। मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की सीमाओं के संगम पर मां नर्मदा की गोद में बसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गाँव वालपुर में आयोजित इस विश्व प्रसिद्ध हाट में युवाओं ने आदिवासी लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और मांदल की थाप पर होने वाले नृत्य का प्रत्यक्ष अनुभव किया।
भ्रांतियों का किया खंडन
हाट में शामिल हुए सामाजिक कार्यकर्ता राकेश देवड़े बिरसावादी ने बताया कि आधुनिकता के दौर में अपनी जड़ों और लोक परंपराओं को समझना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि भौंगर्या हाट के बारे में समाज में कई भ्रांतियां फैलाई गई हैं, जबकि धरातल पर वास्तविकता इसके विपरीत है। इस शुद्ध सामाजिक भौंगर्या हाट को आदिवासियों का वैलेंटाइन डे या प्रणय पर्व कहना पूरी तरह गलत और तर्कहीन है।
तार्किक आधार
श्री देवड़े ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज में रीति-रिवाजों का पालन बहुत कड़ाई से होता है। विवाह के लिए युवक-युवती के गौत्र का मिलान अनिवार्य है; समान गौत्र, माता, माता की माता या पिता की माता के गौत्र में विवाह पूर्णतः वर्जित होता है। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि होली का डांडा गड़ने से लेकर अखातीज तक आदिवासी समाज में विवाह जैसे कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसे में इसे श्प्रणय पर्वश् के रूप में दुष्प्रचारित करना समाज की छवि को धूमिल करने जैसा है।
सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान
वालपुर के इस जनसैलाब और वहां की आत्मीयता ने देवास के युवाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।युवाओं की इस भागीदारी को सोशल मीडिया पर भी काफी सराहना मिल रही है, जिससे इस प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को नई और सही पहचान मिल रही है। इस हाट बाजार में डी -3 यानी दहेज डीजे दारू पर प्रतिबंध लगाने के लिए समाज में जागरूकता कैंप भी लगाया।
इस अवसर पर देवास से अनिल बरला, संदीप ठाकुर, मंगेश बरला, राजू कन्नौजे, रोहित डावर, रोहित चौहान आदि उपस्थित रहे।

1 Comments
बहुत शानदार ख़बर
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