आशा एवं आशा पर्यवेक्षकों ने वेतन, बकाया भुगतान और 1000 रूपये वार्षिक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
देवास। म.प्र. आशा/आशा सहयोगिनी श्रमिक संघ के बैनर तले प्रदेश आव्हान पर देवास जिला मुख्यालय पर आशा एवं आशा पर्यवेक्षकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया तथा मुख्यमंत्री एवं मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नाम संघ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अनुराधा लोधी की उपस्थिति में कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष सुनीता चौहान एवं संगठन मंत्री अनिता सिंह ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत आशा एवं आशा पर्यवेक्षकों को प्रोत्साहन राशि (वेतन) का नियमित भुगतान नहीं किया जा रहा है। कई-कई महीनों तक वेतन लंबित रखा जाता है तथा भुगतान में पारदर्शिता का अभाव है। कर्मचारियों को यह जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जाती कि उन्हें कितनी राशि का भुगतान किया गया है और कितनी राशि बकाया है। संघ का कहना है कि वर्ष 2023 में सरकार द्वारा घोषित ₹1000 की वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ आज तक आशा एवं आशा पर्यवेक्षकों को नहीं दिया गया, जबकि अन्य वर्गों के कर्मचारियों को इसका लाभ मिल रहा है। संगठन ने वर्ष 2024 से इस वार्षिक वेतन वृद्धि का एरियर सहित भुगतान करने की मांग की है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आशा कार्यकर्ताओं को मात्र ₹6000 मासिक मानदेय में कठिन परिस्थितियों में चौबीसों घंटे स्वास्थ्य सेवाएं देनी पड़ती हैं। वहीं आशा पर्यवेक्षकों को भी निर्धारित वेतन के बावजूद यात्रा व्यय स्वयं वहन करना पड़ रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि साप्ताहिक एवं शासकीय अवकाश के नाम पर वेतन कटौती की जाती है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। संघ ने अधिकारियों द्वारा आयुष्मान कार्ड सहित अन्य गैर-विभागीय कार्य कराने तथा कई मामलों में अपने निजी खर्च से कार्य करवाने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया। साथ ही बिना जांच के वेतन कटौती एवं सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई। ज्ञापन के माध्यम से प्रमुख मांगों में प्रत्येक माह की 5 तारीख तक बिना कटौती नियमित वेतन भुगतान, वेतन पर्ची उपलब्ध कराना, ₹1000 वार्षिक वेतन वृद्धि का एरियर सहित भुगतान, पर्याप्त बजट की व्यवस्था, गैर-विभागीय कार्यों के लिए अतिरिक्त भुगतान, आशा कार्यकर्ताओं को ₹26,000 तथा पर्यवेक्षकों को ₹35,000 न्यूनतम वेतन, पृथक यात्रा भत्ता, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, टीम आधारित इंसेंटिव, शासकीय अस्पतालों के निजीकरण पर रोक, सम्मानजनक कार्य वातावरण तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर लंबित राशि का भुगतान शामिल हैं। संघ ने चेतावनी दी कि यदि आशा एवं आशा पर्यवेक्षकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। इस दौरान विमल घावरी, रेखा सोलंकी, सीता ग्रेवाल, सविता चौहान, माया परिते, वर्षा दरबार दीप सिखा, पवित्रा चौहान, जरीना, संगीता पांडे, भागवंता, आशा परमार, राज कुंवर, रीना मालवीय, जसोदा, कमलेश लोधी, आशा भार्गव, रेखा जोशी, ममता यादव, संगीता घुनावत, मंजू चौहान सहित बड़ी संख्या में आशाएं उपस्थित थी।