जो महिला महिमाशाली बन जाती है उसका परिवार भाग्यशाली हो जाता है- राजरत्ना श्रीजी
महिला बने महिमाशाली कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नारी शक्ति ने लिया भाग
देवास। जो महिला स्वयं को महिमाशाली बना देती है उसका संपूर्ण परिवार स्वत ही भाग्यशाली बन जाता है। हम अक्सर देखते हैं जिस घर की महिला सामाजिक, राजनैतिक, व्यवसायिक, धार्मिक क्षेत्र में आगे बढ़कर उदय हो जाती है उसके परिवार का भाग्योदय हो जाता है।महिला शब्द में म याने ममतामयी, हि याने हिम्मत वाली, ला याने लज्जावान। ये तीनों गुण जिस महिला में आ जाते हैं वही महिला अपने नाम को सार्थक कर महिमाशाली बन जाती है। महिला में त्रिवेणी संगम होता है माँ, बहन-बेटी, अर्धांगिनी। जीवन के विभिन्न पहलुओं में महिला इन तीनों रूप से संपूर्ण परिवार की आनंदपूर्वक सेवा करती रहती है। इन गुणों से परिपूर्ण महिला जब महिमाशाली बनने की ओर अग्रसर होती है तो परिजनों का भी यह कर्तव्य है कि उसे उस मार्ग पर जाने के लिए प्रोत्साहित करें।
सिविल लाईन स्थित श्री मुनिसुव्रत स्वामी वीरमणि उपाश्रय में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं को मार्गदर्शित करते हुए यह बात साध्वी राजरत्ना श्रीजी ने कही। इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए साध्वी रिद्धिनिधि श्रीजी ने कहा कि महिलाओं में ये 6 गुण और समाहित है। मार्गदर्शक मूर्ति, सेवा मूर्ति, प्रेम मूर्ति, प्रेरणा मूर्ति, धर्म मूर्ति और क्षमा मूर्ति। इन 6 सद्भावों के साथ एक नारी परिवार, समाज एवं देश की सेवा करते हुए सद्कर्म मूर्ति के रूप में प्रतिष्ठित होती ही रहती है। इस स्थिति में समाज एवं देश का यह कर्तव्य है कि वह महिला मात्र को आदर एवं सम्मान की दृष्टि से देखे एवं उन्हें प्रोत्साहित कर सहयोग करें। प्रवक्ता विजय जैन ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान बेटी के जन्म से लेकर उसे दादी बनने तक की प्रक्रिया को नृत्य, नाटक एवं प्रवचन के द्वारा सारगर्भित रूप से समझाया गया। कार्यक्रम का संचालन श्वेता जैन ने किया। संपूर्ण आयोजन का लाभ प्रेेमलता बहन डी.सी.जैन परिवार ने प्राप्त किया।
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