जहां सुबुद्धि वहां समृद्धि और जहां कुबुद्धि वहां दुख का वास होता है- सद्गुरु मंगल नाम साहेब,,
देवास। जीवन में सुमति और कुमति का बड़ा महत्व बताया गया है। रामचरितमानस की एक चौपाई में स्पष्ट है कि सुबुद्धि यानी अच्छी बुद्धि और कुबुद्धि यानी खोटी बुद्धि सबके हृदय में रहती है। जहां सुबुद्धि होती है वहां नाना प्रकार की संपत्ति, सुख और समृद्धि रहती है, और जहां कुबुद्धि होती है वहां विभिन्न प्रकार की विपत्ति और दुख का वास होता है।
यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने सद्गुरु कबीर सर्वहारा प्रार्थना स्थलीय सेवा समिति, मंगल मार्ग टेकरी द्वारा आयोजित गुरुवाणी पाठ एवं गुरु-शिष्य संवाद में व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि लोग मूर्ति तोड़ने जाते हैं, फलाने की किताब जला दो कहते हैं। जबकि न मूर्ति तोड़ने की जरूरत है, न किसी किताब को जलाने की और न ही किसी रेखा को मिटाने की जरूरत है। आप इतनी बड़ी रेखा में प्रवेश कर जाओ कि कोई उसे छोटी न कर पाए।
उन्होंने कहा कि शब्द के भीतर ही सब समाया है भूत, भविष्य और वर्तमान। शब्द के भीतर ही सारे संसार का भेद है। जितनी लिखापढ़ी में लोग छल-छिद्र कर रहे हैं, वह छोटी पड़ जाएगी। जब एक सत्य और परम प्रेम की भाषा आपके भीतर आ जाती है, तब आपको सबमें अपना परम प्रिय रूप ही दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि लोग अपने घर की मूर्तियां निकालकर बाहर फेंक देते हैं, जबकि वह मूर्ति अपने अंदर ऐसी समाई हुई है जिसकी देह नहीं है। वह विदेही है, जो श्वास रूप में है, जो विदेही जीव है। जिस दिन उस उजियारे में खड़े हो जाओगे और अपनी ओर लौटोगे, अपने स्वयं के प्रकाश में खड़े होने पर सारी देह, पद, पदार्थ, तत्व, प्रकृति, बल और माया का अंधियारा दूर हो जाएगा।
जब आप स्वयं के प्रकाश में खड़े होंगे, तो यह आकार-प्रकार की सारी रेखाएं छोटी पड़ जाएंगी। स्वयं के प्रकाश में, स्वयं के उजियारे में खड़े होने पर जितनी भी छल-छिद्र की देह है, सब नजर आने लगेगी और यह अनुभव होगा कि अभी तक झूठ ही जीवन जी रहे थे।
इस दौरान सद्गुरु मंगल नाम साहेब का साथ-संगत द्वारा शाल एवं श्रीफल भेंट कर आशीर्वचन लिए गए। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।
देवास।

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