रामकथा पूर्णाहूति का संदेश: धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलकर निभाएं अपने कर्तव्य- पं. ओमप्रकाश चतुर्वेदी
देवास। गंगानगर परशुराम वाटिका गार्डन, में चल रही नौ दिवसीय श्री रामकथा ज्ञान यज्ञ की रविवार को पूर्णाहुति श्री राम राज्याभिषेक एवं रामराज्य की स्थापना के सुंदर प्रसंग के साथ हुई। आयोजक सुरेश चंद्र व्यास सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री ने बताया कि पूर्णाहुति के दिन कथा प्रात: 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक हुई। कथावाचक पं. ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने व्यासपीठ से कहा कि जब श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद माता सीता के साथ अयोध्या लौटने के लिए मार्ग प्रशस्त किया। अयोध्या में श्रीराम की विजय का स्वागत और उनकी घर वापसी एक ऐतिहासिक और धार्मिक घटना मानी जाती है। रामायण के इस हिस्से को राम की अयोध्या वापसी के रूप में जाना जाता है। श्रीराम की अयोध्या वापसी के समय सम्पूर्ण अयोध्या नगरी दीपों से सजाई गई थी, जिसे हम दीपावली के रूप में मनाते हैं। अयोध्या लौटने के बाद श्रीराम ने 14 वर्षों का वनवास समाप्त किया और अपनी राज्याभिषेक की तैयारी की। राज्याभिषेक के समय, विश्वामित्र, वशिष्ठ, और अन्य महान ऋषियों द्वारा श्रीराम को शास्त्रों और धार्मिक नियमों के अनुसार राज्य करने की विधि बताई गई। व्यासपीठ की आरती पूर्व महापौर ठा. जयसिंह, पूर्व निगम आयुक्त एसएन झारिया, आद्य गौड़ ब्राह्मण समाज अध्यक्ष मधुसूदन शर्मा, पूर्व अध्यक्ष शंकर लाल शर्मा मय कार्यकारिणी, कैलाश व्यास इंदौर, राजेंद्र व्यास लोहारदा, संजय व्यास, बलराम पटेल, बलराम पुरोहित खातेगांव, बीके तिवारी देवास आदि ने की। कथा की पूर्णाहूति के अवसर पर व्यास पूजन महेश व्यास, जगदीश व्यास सुरेश व्यास ने सपरिवार करते हुए गुरुजी का शाल-श्रीफल से अभिनंदन पत्र देकर अभिनंदन कर आशीर्वाद लिया। गुरूजी ने आगे कहा कि रामकथा की पूर्णाहूति का संदेश यही है कि जीवन के हर पहलू में धर्म, सत्य, और न्याय का पालन करते हुए अपने कर्तव्यों को निभाना चाहिए, और फिर भगवान के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए।

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