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डॉ अंबेडकर का संवैधानिक दर्शनआधुनिक भारत में सामाजिक न्याय विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

डॉ अंबेडकर का संवैधानिक दर्शन
आधुनिक भारत में सामाजिक न्याय विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
देवास। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस श्री कृष्णजीराव पवार शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय देवास के राजनीतिक विज्ञान विभाग द्वारा आईक्यूएसी एवं उच्च शिक्षा विभाग भोपाल के तत्वावधान में डॉ भीमराव अंबेडकर के जन्म जयंती के उपलक्ष में डॉ भीमराव अंबेडकर का संवैधानिक दर्शन आधुनिक भारत में सामाजिक न्याय विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सेमिनार के प्रारंभ में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ ने संस्कार हॉल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को देखा एवं सुना। संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वल एवं सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुआ। संगोष्ठी में प्रमुख वक्ता डॉ ममता चंद्रशेखर, प्राचार्य प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस अटल बिहारी वाजपेई महाविद्यालय इंदौर तथा  डॉ रिपु सूदन सिंह, प्रोफेसर, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ थे। संगोष्ठी के शुभारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ एसपीएस राणा, प्रमुख वक्ता डॉ ममता चंद्रशेखर, डॉ सीमा सोनी, डॉ आरके मराठा, डॉ लता धुपकरिया, डॉ ममता लावरे, रजत राठौर ने मंच साझा किया। प्रमुख वक्ता डॉ ममता चंद्रशेखर ने अपने वक्तव्य में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के बारे में विस्तार से बताते हुए संवैधानिक गरिमा संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य अनुच्छेद 32 में निहित संवैधानिक उपचार, स्वतंत्रता ,समता, बंधुत्व आदि को बाबा साहब से जोड़कर विस्तृत रूप से बताया। उन्होंने अपने वक्तव्य में श्रम तथा श्रमिक का विभाजन जाति व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण को वर्तमान में प्रधानमंत्री के वक्तव्य से जोड़कर नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि मानव को मानवता के लिए सतत कार्य करना चाहिए। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ एसपीएस राणा ने अपने उद्बोधन में कहा कि सामाजिक न्याय तथा सामाजिक समता के बारे में विस्तार से बताया। तकनीकी सत्र में प्रमुख वक्ता के रूप में प्रोफेसर रिपु सूदन सिंह ने अपने वक्तव्य में  सामाजिक न्याय की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि अंबेडकर की दृष्टि को समझने के लिए अम्बेडकर के साहित्य का अध्ययन जरूरी हैं । जब हम आधुनिक भारत में सामाजिक न्याय की बात करते है तब बंधुता के  बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं है । क्योंकि बंधुता का भाव ही हमें अन्याय के खिलाफ जीत दिला सकता है। संगोष्ठी हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई जिसमें देश के शिक्षाविदों तथा शोधार्थियों ने कुल 35 शोध पत्र प्रस्तुत किये तथा 157 प्रतिभागियों ने पंजीयन किया। संगोष्ठी आयोजन सचिव डॉक्टर लता धुपकरिया ने संगोष्ठि का  प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। संगोष्ठी को सफल बनाने में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ का सराहनीय सहयोग रहा। प्रथम सत्र का संचालन डॉ संजय गाड़गे ने तथा द्वितीय सत्र का संचालन रजत राठौर के द्वारा किया गया। संगोष्ठी के अंत में डॉ सीमा सोनी ने सभी का आभार प्रकट किया।

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