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100 बुजुर्गों का ‘वृद्धाश्रम बसेरा’ में छूटा जीवन, अब गयाजी में मिलेगा श्राद्ध का सम्मान,, - अपनों ने भुलाया तो आश्रम संचालक दिनेश चौधरी ने बेटा बनकर निभाया रिश्ता, दिवंगत बुजुर्गों की स्मृति में गयाजी में होगा पिंडदान

100 बुजुर्गों का ‘वृद्धाश्रम बसेरा’ में छूटा जीवन, अब गयाजी में मिलेगा श्राद्ध का सम्मान,,

 - अपनों ने भुलाया तो आश्रम संचालक दिनेश चौधरी ने बेटा बनकर निभाया रिश्ता, दिवंगत बुजुर्गों की स्मृति में गयाजी में होगा पिंडदान

देवास। मीठा तालाब-राजोदा रोड स्थित वृद्धाश्रम ‘बसेरा’ बीते 25 वर्षों से उन बुजुर्गों के लिए घर बना हुआ है, जिन्हें उनके अपनों ने भुला दिया। मार्च 2001 से संचालित इस आश्रम में अब तक करीब 440 बुजुर्ग रहने के लिए आए। इनमें से 100 बुजुर्गों ने आश्रम को ही अपना अंतिम घर माना और यहीं अंतिम सांस ली। परिवार से दूर इन बुजुर्गों की मृत्यु के बाद भी आश्रम प्रबंधन ने उनका साथ नहीं छोड़ा और संचालक दिनेश चौधरी बेटा बनकर दिवंगत बुजुर्गों से रिश्ता निभा रहे हैं। मृत आत्माओं की शांति एवं उनकी स्मृति को सम्मान देने के उद्देश्य से आश्रम संचालक दिनेश चौधरी 8 अक्टूबर को गयाजी के लिए रवाना हुए। वे वहां आश्रम में दिवंगत हुए सभी 100 बुजुर्गों के नाम से पिंडदान एवं संबंधित कर्मकांड संपन्न करेंगे। बसेरा वृद्धाश्रम के कार्यालय में पिछले 25 वर्षों के दौरान दिवंगत हुए सभी 100 बुजुर्गों की तस्वीरें लगाई गई हैं। प्रबंधन का कहना है कि परिवार से दूर रहने वाले इन बुजुर्गों की यादें आश्रम से हमेशा जुड़ी रहें, इसी भावना से उनकी तस्वीरों को सम्मानपूर्वक स्थान दिया गया है। आश्रम में किसी बुजुर्ग की मृत्यु होने पर उनके परिजनों को सूचना दी जाती है। अब तक केवल 5 बुजुर्गों के शव उनके परिजन अंतिम संस्कार के लिए अपने साथ ले गए, जबकि शेष 95 बुजुर्गों का अंतिम संस्कार आश्रम संचालक एवं प्रबंधन द्वारा ही कराया गया। आश्रम संचालक दिनेश चौधरी का गयाजी जाकर 100 दिवंगत बुजुर्गों का पिंडदान करना केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव भी है, जिन्होंने अपने जीवन का अंतिम पड़ाव ‘बसेरा’ में बिताया। श्री चौधरी ने बताया कि देवास-शाजापुर सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने उनके गयाजी जाने के लिए ट्रेन में रिजर्वेशन करवाया है। संचालक चौधरी के अनुसार अभी तक अन्नदान व पिंडदान उज्जैन, क्षिप्रा व ओंकारेश्वर में किया जा रहा था। पहली बार दिवंगत बुजुर्ग की संख्या 100 होने पर सभी का पिंडदान एक साथ गयाजी में होगा।

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