लेखन की अपनी कोई विचारधारा नहीं, उसके लिए मनुष्यता ही सर्वोपरि,,
अच्छा लेखक हमेशा मनुष्यता के पक्ष में खड़ा होता है,,
'विडम्बनाओं के आख्यान' विषय पर वक्ताओं ने की मानीखेज बातें,,
भावेश कानूनगो के सद्यः प्रकाशित व्यंग्य संग्रह 'चौधराहट बनी रहे' का हुआ विमोचन
देवास, 03 अक्टूबर. लेखन की अपनी कोई तयशुदा विचारधारा नहीं होती. लेखक हमेशा मनुष्यता के पक्ष में खड़ा होता है. वह पूरे समय मानवीय गरिमा को बचाए रखने और दुनिया को बेहतर व ख़ुशनुमा बनाने के लिए समाज की विडम्बनाओं को सामने लाता है. वह समाज को चेताता है और अपने समय पर कड़ी नज़र रखता है.
यह बात मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की देवास इकाई और लिटरेचर क्लब के आयोजन 'विडम्बनाओं का आख्यान' में प्रसिद्ध व्यंग्यकार और अध्येता डॉ पिलकेंद्र अरोरा ने भावेश कानूनगो के सद्यः प्रकाशित व्यंग्य संग्रह 'चौधराहट बनी रहे' का विमोचन करते हुए कही. उन्होंने मशहूर व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के एक साक्षात्कार की चर्चा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में व्यंग्य लेखन की परम्परा बहुत समृद्ध रही है. प्रतिष्ठित व्यंग्यकार (आईपीएस) डॉ मलय जैन ने अपने शुभकामना सन्देश में कहा कि व्यंग्य की जो फसल लहलहाती है, उसकी जड़ में विडम्बनाएँ ही तो हैं. समाज में जितनी विसंगतियाँ होंगी, एक अच्छे और इथिक्स से जुड़े व्यंग्यकार की आत्मा उतनी ही जमकर उसे कचोटेगी. और यही कचोट एक अच्छे व्यंग्य लिखने को बाध्य करेगी.
इससे पहले प्रेमचन्द सृजनपीठ के निदेशक और व्यंग्यकार मुकेश जोशी ने भावेश कानूनगो के संग्रह में शामिल व्यंग्यों पर अपनी बात करते हुए कहा कि ये बेहतर भाषा और अपनी अनूठी शैली के लिए अलग पहचान बन सकते हैं. उन्होंने देवास में लिटरेचर क्लब की सक्रियता की प्रशंसा करते हुए कहा कि देवास शहर इन दिनों साहित्य के क्षेत्र में बेहतर रच रहा है, जिसकी धाक अब देश स्तर तक है. रतलाम से आए चित-परिचित व्यंग्यकार और कवि आशीष दशोत्तर ने व्यंग्य विधा पर बात करते हुए कहा कि केवल हास्य से अच्छी व्यंग्य रचना नहीं बन सकती. इसके लिए लेखक को अपने व्यंग्य की मारक क्षमता पैनी करनी पड़ती है. अच्छी रचनाएँ सोफे की सुविधा से नहीं, अभावों और संत्रासों की फटी हुई चटाई से आती है. भावेश कानूनगो ने कहा कि वैसे तो मेरे दादा और पिता दोनों लेखन से जुड़े थे लेकिन मेरी लेखन यात्रा में लिटरेचर क्लब की बड़ी भूमिका है, जहाँ बेहतर ढंग से लेखक-कवियों को गढ़ा-सँवारा जाता है.
वक्ताओं को सुनने इतनी बड़ी तादात में शहर के श्रोता पहुँचे कि सभागार छोटा पड़ गया. कुर्सियाँ नहीं मिलने पर श्रोताओं ने खड़े-खड़े सुना. बाद में तो खड़े रहने की भी जगह नहीं बची तो बाहर खड़े होकर सुना. लगभग डेढ़ सौ से ज़्यादा सुधि श्रोताओं की उपस्थिति पर अतिथियों ने कहा कि देवास में साहित्य, संगीत और कला को सराहने का बेहतर वातावरण है. कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार प्रकाश कान्त, रजनीश दवे, गंगासिंह सोलंकी, ओम वर्मा, मनीष वैद्य, सतीश जोशी, दिनेश मिश्रा, रामेश्वर पटेल, चन्द्रावती जाधव, प्रदीप जोशी, अशोक चौधरी, महेंद्र उपाध्याय, सतीश दुबे, ओमप्रकाश चौधरी, सुदर्शन दुबे, जयंत शर्मा, मक़सूद अली, आदिल पठान, श्रवण कानूनगो और महेंद्र दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे
आयोजन का सुचारू संचालन मनीष शर्मा ने किया. स्वागत भाषण शांतनु तथा अतिथि परिचय तनिष्का वैद्य ने किया. आभार प्रदर्शन अमेय कान्त और सुहानी कानूनगो ने किया. अतिथियों का स्वागत विक्रमसिंह गोहिल, विजय श्रीवास्तव, सुधीर कुमार सोमानी, राजेश कानूनगो, संदीप भटनागर, सुरेश चंद सोनी, संतोष स्वर्णकार, अनार सिंह ठाकुर, सागर कानूनगो, श्रीमती श्वेता कानूनगो और पवन नागर ने किया.
अच्छा लेखक हमेशा मनुष्यता के पक्ष में खड़ा होता है,,
'विडम्बनाओं के आख्यान' विषय पर वक्ताओं ने की मानीखेज बातें,,
भावेश कानूनगो के सद्यः प्रकाशित व्यंग्य संग्रह 'चौधराहट बनी रहे' का हुआ विमोचन
देवास, 03 अक्टूबर. लेखन की अपनी कोई तयशुदा विचारधारा नहीं होती. लेखक हमेशा मनुष्यता के पक्ष में खड़ा होता है. वह पूरे समय मानवीय गरिमा को बचाए रखने और दुनिया को बेहतर व ख़ुशनुमा बनाने के लिए समाज की विडम्बनाओं को सामने लाता है. वह समाज को चेताता है और अपने समय पर कड़ी नज़र रखता है.
यह बात मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की देवास इकाई और लिटरेचर क्लब के आयोजन 'विडम्बनाओं का आख्यान' में प्रसिद्ध व्यंग्यकार और अध्येता डॉ पिलकेंद्र अरोरा ने भावेश कानूनगो के सद्यः प्रकाशित व्यंग्य संग्रह 'चौधराहट बनी रहे' का विमोचन करते हुए कही. उन्होंने मशहूर व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के एक साक्षात्कार की चर्चा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में व्यंग्य लेखन की परम्परा बहुत समृद्ध रही है. प्रतिष्ठित व्यंग्यकार (आईपीएस) डॉ मलय जैन ने अपने शुभकामना सन्देश में कहा कि व्यंग्य की जो फसल लहलहाती है, उसकी जड़ में विडम्बनाएँ ही तो हैं. समाज में जितनी विसंगतियाँ होंगी, एक अच्छे और इथिक्स से जुड़े व्यंग्यकार की आत्मा उतनी ही जमकर उसे कचोटेगी. और यही कचोट एक अच्छे व्यंग्य लिखने को बाध्य करेगी.
इससे पहले प्रेमचन्द सृजनपीठ के निदेशक और व्यंग्यकार मुकेश जोशी ने भावेश कानूनगो के संग्रह में शामिल व्यंग्यों पर अपनी बात करते हुए कहा कि ये बेहतर भाषा और अपनी अनूठी शैली के लिए अलग पहचान बन सकते हैं. उन्होंने देवास में लिटरेचर क्लब की सक्रियता की प्रशंसा करते हुए कहा कि देवास शहर इन दिनों साहित्य के क्षेत्र में बेहतर रच रहा है, जिसकी धाक अब देश स्तर तक है. रतलाम से आए चित-परिचित व्यंग्यकार और कवि आशीष दशोत्तर ने व्यंग्य विधा पर बात करते हुए कहा कि केवल हास्य से अच्छी व्यंग्य रचना नहीं बन सकती. इसके लिए लेखक को अपने व्यंग्य की मारक क्षमता पैनी करनी पड़ती है. अच्छी रचनाएँ सोफे की सुविधा से नहीं, अभावों और संत्रासों की फटी हुई चटाई से आती है. भावेश कानूनगो ने कहा कि वैसे तो मेरे दादा और पिता दोनों लेखन से जुड़े थे लेकिन मेरी लेखन यात्रा में लिटरेचर क्लब की बड़ी भूमिका है, जहाँ बेहतर ढंग से लेखक-कवियों को गढ़ा-सँवारा जाता है.
वक्ताओं को सुनने इतनी बड़ी तादात में शहर के श्रोता पहुँचे कि सभागार छोटा पड़ गया. कुर्सियाँ नहीं मिलने पर श्रोताओं ने खड़े-खड़े सुना. बाद में तो खड़े रहने की भी जगह नहीं बची तो बाहर खड़े होकर सुना. लगभग डेढ़ सौ से ज़्यादा सुधि श्रोताओं की उपस्थिति पर अतिथियों ने कहा कि देवास में साहित्य, संगीत और कला को सराहने का बेहतर वातावरण है. कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार प्रकाश कान्त, रजनीश दवे, गंगासिंह सोलंकी, ओम वर्मा, मनीष वैद्य, सतीश जोशी, दिनेश मिश्रा, रामेश्वर पटेल, चन्द्रावती जाधव, प्रदीप जोशी, अशोक चौधरी, महेंद्र उपाध्याय, सतीश दुबे, ओमप्रकाश चौधरी, सुदर्शन दुबे, जयंत शर्मा, मक़सूद अली, आदिल पठान, श्रवण कानूनगो और महेंद्र दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे
आयोजन का सुचारू संचालन मनीष शर्मा ने किया. स्वागत भाषण शांतनु तथा अतिथि परिचय तनिष्का वैद्य ने किया. आभार प्रदर्शन अमेय कान्त और सुहानी कानूनगो ने किया. अतिथियों का स्वागत विक्रमसिंह गोहिल, विजय श्रीवास्तव, सुधीर कुमार सोमानी, राजेश कानूनगो, संदीप भटनागर, सुरेश चंद सोनी, संतोष स्वर्णकार, अनार सिंह ठाकुर, सागर कानूनगो, श्रीमती श्वेता कानूनगो और पवन नागर ने किया.

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