अमलतास यूनिवर्सिटी में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सीएमई का एवं भव्य आयोजन,,
डॉ. पीटर वास्टन ने आपातकालीन पेट समस्याओ की दी जानकारी
देवास: अमलतास यूनिवर्सिटी में गैस्ट्रोएन्टरोलॉजी विषय पर आधारित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सतत चिकित्सकीय शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय अतिथि मुख्य वक्ता डॉ. पीटर वास्टन द्वारा “Red Flags in Gastroenterology and Management in Emergency” विषय पर अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसे सभी प्रतिभागियों ने बेहद उपयोगी और प्रभावशाली बताया। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में पेट से संबंधित आपातकालीन बीमारियों की बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. वाटसन ने उन गंभीर स्थितियों के संकेतों (Indicators) पर जोर दिया जिनमें तत्काल आपातकालीन प्रबंधन की आवश्यकता होती है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:रक्तस्राव: उल्टी में रक्त आना, या काले, चिपचिपे मल का होना ।गंभीर लक्षण पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी या दस्त,अन्य जटिलताएं पेट में छिद्र या सेप्सिस के लक्षण दिखना आदि का संक्षेप विवरण दिया |
उन्होंने बताया कि आपातकालीन प्रबंधन में रोगी का तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन, शरीर को स्थिर करने के लिए तरल पदार्थ और रक्त उत्पाद जैसे उपाय, और संभावित सर्जरी की तैयारी शामिल होती है।
इस कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञों के साथ-साथ अमलतास परिवार के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भी अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई |
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में अमलतास इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी के प्रिंसिपल डॉ. योगेंद्र सिंह भदोरिया, तथा उनकी विशेषज्ञ टीम डॉ. नेहा जैन और डॉ. आन्या जायसवाल ने
“Homoeopathy – A Key Component in the Integrated Management of Gastroenterology Disorders” विषय पर अपना सारगर्भित एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया।
तीनों वक्ताओं ने एकीकृत चिकित्सा प्रणाली में होम्योपैथी की भूमिका, इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों में इसकी प्रभावशीलता को अत्यंत सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली तरीके से समझाया। वक्ताओं ने इस अवसर पर डॉ. योगेंद्र सिंह भदोरिया के नेतृत्व और सतत मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता में उनका योगदान अमूल्य है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ चिकित्सकों, फैकल्टी, इंटरन्स एवं छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने इस अंतर्राष्ट्रीय सीएमई को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अत्यंत उपयोगी बताया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अमलतास विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. शरद चंद्र वानखेड़े और डॉ. अभय गुप्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एच.एम.पी. सिंह, एकेडमिक डीन, ने की। संगोष्ठी का सफल संचालन वाणी धारया द्वारा किया गया।
अमलतास विश्वविद्यालय के चेयरमैन श्री मयंक राज सिंह भदौरिया जी द्वारा बताया गया की अमलतास यूनिवर्सिटी भविष्य में भी ऐसे उच्च-स्तरीय शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए तत्पर है, जो चिकित्सा शिक्षा के मानकों को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँगे।

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