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जो सुरगुरु का उपासक होता है वह ब्रह्मांड को जान लेता है...सतगुरु मंगल नाम साहेब

जो सुरगुरु का उपासक होता है वह ब्रह्मांड को जान लेता है...सतगुरु मंगल नाम साहेब

देवास। बिन पवन का पंथ बिन बस्ती का देश, बिना पिंड का पुरुष कहे कबीर संदेश। बिना पिंड का पुरुष जिसका शरीर नहीं है। यह बिना पिंड का पुरुष है स्वांस। और संसार में जितनी भी देह हैं सब नारी है। पुरुष केवल श्वास है। जो विदेही हैं। श्वास जो है स-वर्ग है जो देह विहीन है। जिसकी देह नहीं है।  स्वांस जब देह हीन  हो जाती है, तो स्वर्गवास कहलाता है। यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब  ने चूना खदान पर आयोजित चौका आरती, गुरुवाणी पाठ में व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि सुखी नदी अमी बहाई, श्वास एक सूखी अमी नदी है।  जिसमे पांचो तत्व धरती, आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि सब बह रहे हैं। और जो इन तत्त्वों में प्रवेश कर गया। जो सुरगुरु का उपासक होता है वह ब्रह्मांड को जानने वाला, वह सब घाटों को जानने वाला होता है। सब घट को जा,नने वाला सुर गुरु है। जिसने सुर को साध लिया वह सब को साथ लेता है। वह सब घाटों को जान लेता है। इसलिए सद्गुरु कबीर ने कहा है कि और किसी घाट पर मत भटको। जो अवगत घाट हैं, जो घाट दिखता ही नहीं। जो अपने आप में घट गया। वही घाट इस सांसारिक भवसागर से पर करेगा। आगे कहा कि सारे संसार को जीतने के बाद जय जगदीश हरे, जो सारे जगत को जानने वाला जगतपति, मलिक लाखों को कैसे जीतेगा। तो उसने कहा कि मैं सारे जगत की झूठ से हार गया हूं। की मोह माया वासनाओं में फंसे सारे जगत कि झूठ से हार गया हूं। कि मोह माया वासनाओं में उलझे इन संसारियों को कैसे समझाऊं।  आगे कहा कि गगन आकाश को भी कहते हैं और अपने शरीर में जो कमर में है वह भी गगन है। जिसमें  भी बरसात होती है। जितनी भी देह हैं वह सब मां की नाभि कमल से ही बहकर आई है। बिन धरती अंकुर। जितनी भी देह है सब बिना धरती के ही अंकुरित हुई है। सतगुरु मंगल नाम साहब के सानिध्य में नीरज साहब ने चौका आरती संपन्न कराई इस दौरान साथ संगत द्वारा सतगुरु मंगल नाम साहब को नारियल भेंट कर आरती की। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।

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