अंतिम सत्य यही है कि यह तन खाक में मिल जाएगा इससे पहले कि जाग जाओ....सद्गुरु मंगल नाम साहेब
देवास। चादर हो गई बहुत पुरानी, अब सोच समझ अभिमानी। कबीर साहब कहते हैं कि शरीर रूपी चादर पुरानी हो गई है। यह चादर अजब जुलाहे ने रची है और कर्म के सूत्र से इसे मजबूत की है। परंतु माया मोह ने इसे मैली कर दी है। संतों की संगत करके ज्ञान के प्रकाश से इसे धो लीजिए। यह अनमोल जीवन फिर नहीं मिलेगा। यह शरीर एक सुंदर नगर के समान है। जिसमें सद्गुण रूपी संपत्ति मौजूद है। परंतु यदि होश ना हो, तो लोभ लालच,मान, बढ़ाई, काम, क्रोध, माया अहंकार रूपी चोर प्रवेश कर जाते है। यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने श्री गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में 28 दिसंबर को निकलने वाले नगर कीर्तन का गुरुसिंग सभा द्वारा आमंत्रण देने के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि काम क्रोध लोभ मोह रूपी यह चोर तोप, तलवार, हथियारों के साथ नहीं आते। न ही इन्हें कोई देख पाता है। इस काया रूपी नगर को वह तोड़ते फोड़ते भी नहीं है। उन्हें इस नगरी से भी कुछ लेना देना नहीं है। वह तो हमारे भीतर जो सदवर्ती है उसे पकड़ लेते है। कोई सहायता भी नहीं कर पाएगा। सुख, संपत्ति, धन, वैभव मान, बढ़ाई, पद प्रतिष्ठा सब समाप्त हो जाएगी। ढूंढने पर भी तुम्हारा पता नहीं चलेगा। कोई खोज भी नहीं पाएगा। सद्गुरु ही तुम्हें आत्म तत्व से परिचय कराकर तुम्हारी ज्ञान की खिड़की खोलेगा। इसलिए साहब कहते हैं कि सत्य नाम के सुमिरण में जो आनंद है, वह धन दौलत में नहीं है। अंतिम सत्य यही ही है कि यह तन खाक में मिल जाएगा चाहे कितना भी घमंड कर लो। इससे पहले कि जाग जाओ। आत्म तत्व धीरज में ही मिलेगा। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।

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