मराठी भाषी हमेशा सुसंस्कृत होते हैं,अपनी मातृभाषा का गौरव बनाए रखते हैं-...डॉ. अनुराधा सुपेकर,,
बृहन्महाराष्ट्र मंडल के 74 वें अधिवेशन का शुभारंभ
देवास: [शकील कादरी] शहर के मंडी व्यापारी धर्मशाला में शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को बृहन्महाराष्ट्र मंडल के 74वें तीन दिवसीय वार्षिक अधिवेशन का भव्य शंखनाद हुआ। अधिवेशन के प्रथम दिवस के अवसर पर मराठी भाषा गौरव दिवस के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक संध्या शब्दस्वरांचा सुवर्ण प्रवास का सफल आयोजन किया गया।
दीप प्रज्वलन और आतिथ्य सत्कार
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अनुराधा सुपेकर (डीन, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन) एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में मण्डल अध्यक्ष मिलिंद महाजन, मण्डल के प्रधान कार्यवाह दिलीप कुंभोजकर, समाज अध्यक्ष दीपक कर्पे एवं महिला उपाध्यक्ष पूनम कुलकर्णी मंचासीन रहे। अधिवेशन के जनसंपर्क प्रभारी उदय टाकलकर, अतुल मद्धव एवं शिरीष खड़ीकर ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि अतिथियों का स्वागत पारंपरिक गरिमा के साथ किया गया। दिव्या गोटी ने मुख्य अतिथि डॉ. अनुराधा सुपेकर को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया। वहीं, मिलिंद महाजन का स्वागत संजय कोटस्थाने , दिलीप कुमभोजकर का स्वागत चंद्रशेखर दीवान ने और दीपक कर्पे का स्वागत विवेक बक्षी ने किया।
मातृभाषा के प्रति संकल्प का आह्वान
मुख्य अतिथि डॉ. अनुराधा सुपेकर ने अपने संबोधन में मराठी भाषा गौरव दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देवास शहर को इस गरिमामय अधिवेशन की मेजबानी का सौभाग्य मिला है, यह हर्ष का विषय है। उन्होंने मराठी समाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि मराठी भाषी लोग सदैव सुसंस्कृत होते हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए आह्वान किया कि हम सभी यह संकल्प लें कि अपने घरों में अनिवार्य रूप से अपनी मातृभाषा मराठी में ही बात करेंगे, ताकि हमारी संस्कृति और भाषा की जड़ें भविष्य की पीढ़ी में भी मजबूत बनी रहें।
सुरमयी सांस्कृतिक प्रस्तुति
अधिवेशन के पहले दिन शब्दस्वरांजली समूह, इंदौर द्वारा मराठी साहित्यकार कवि कुसुमाग्रज की कालजयी रचनाओं को स्वरबद्ध कर प्रस्तुत किया गया। मुख्य गायक वैशाली बकोरे और राजेंद्र गलगले की सुमधुर प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का भावपूर्ण पठन और कुशल संचालन जया गाडगे, वैजयंती दाते और अल्का फणसे द्वारा किया गया।
वादकों की जुगलबंदी
प्रस्तुति को संगीत की ऊंचाइयों तक ले जाने में पं. कमल कामले (वायोलिन), रवि साल्के (की-बोर्ड), राहुल बेने (तबला) और आयुषी मकवाना (ऑक्टोपैड) ने अपनी सधी हुई संगत से समां बांध दिया।
देशभर के विभिन्न प्रांतों से आए मराठी समाज के प्रतिनिधियों ने देवास के आतिथ्य और इस गौरवमयी सांस्कृतिक संध्या की मुक्तकंठ से सराहना की। अधिवेशन के आगामी दो दिनों में विभिन्न संगठनात्मक और वैचारिक सत्रों का आयोजन होगा। समस्त कार्यक्रम का सफल संचालन सौ.स्मिता म्हाडगुत ने किया।

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