देवास। श्री कृष्ण ने अपने जन्म से ही त्याग की पीड़ा को सहकर समाज को संस्कारों के प्रति सजग रहने का सन्देश दिया जिससे आसुरी शक्ति की कभी विजय न होने पाए.. कारावास मे जन्म लेकर माता पिता से विरह की कल्पना मात्र से हमारी भावनाएं करुणामय हो जाती हैं. सनातन की धर्म ध्वजा भागवत कथा में वर्णित विभिन्न दृष्टांतो से शक्ति पा कर लहराती है.. हिन्दुओं को अपनी संस्कृति को एक भाव से अपना कर सभी के सुख दुःख में भागी बनना है क्यूंकि हमारे प्रभु की हर लीला में समरसता का सन्देश है। कथावाचक अर्चना दीदी ने सिविल लाइन शिक्षक नगर मे आयोजित भागवत कथा मे व्यास पीठ से कथा से प्राप्त प्रेरक विचार व्यक्त व्यक्त किये।
भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कारागार के प्रतिक में श्रीकृष्ण का जन्म चित्रण किया गया तत्पश्चात जैसे ही वासुदेव टोकरी मे पुत्र को लेकर निकले उपस्थित जन जय घोष कर भजनो की धुन पर झूमते हुए नृत्य करने लगे। इस अवसर पर नगर पालिक निगम सभापति रवि जैन विशेष रूप से उपस्थित हो कर प्रभु पूजा की एवं व्यास पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्य जजमान एवं आयोजक मालती अशोक शुक्ला ने बताया कि, नौ मार्च से प्रारंभ भागवत कथा का समापन पंद्रह मार्च को होगा। भक्तजन अर्चना दीदी के मुखरबिंद से प्रवाहित भागवत कथा धारा का आनंद प्रति दिन दोपहर एक बजे से चार बजे तक ले रहें है।

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