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रामकथा: बाललीलाओं, ताडक़ा-सुबाहु वध और अहिल्या उद्धार का पं. ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने सुनाया भावपूर्ण प्रसंग

रामकथा: बाललीलाओं, ताडक़ा-सुबाहु वध और अहिल्या उद्धार का पं. ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने सुनाया भावपूर्ण प्रसंग

देवास।
 परशुराम वाटिका गार्डन, गंगानगर में चल रही श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने भगवान श्रीराम की बाललीलाओं, ताडक़ा एवं सुबाहु जैसे राक्षसों के वध तथा माता अहिल्या के उद्धार के प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं विस्तारपूर्वक वर्णन किया। आयोजक सुरेश चंद्र व्यास (सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री, नगर निगम देवास) ने बताया कि श्रीरामकथा श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है और पूरे पंडाल में भक्ति का माहौल बना रहा। कथा के साथ शाम को महिला मण्डली द्वारा भजन-कीर्तन भी किया जा रहा है। पं. चतुर्वेदी ने कहा कि अयोध्या में जन्म लेने के बाद श्रीराम ने अपने बाल्यकाल में अनेक दिव्य लीलाएं कीं, जिनसे उनके अलौकिक स्वरूप का परिचय मिलता है। गुरु विश्वामित्र के साथ वनगमन के प्रसंग में उन्होंने ताडक़ा नामक राक्षसी का वध कर ऋषियों को उसके आतंक से मुक्त कराया। इसके पश्चात श्रीराम ने सुबाहु का संहार किया और मारीच को दूर समुद्र में भगा दिया, जिससे यज्ञों में विघ्न डालने वाले राक्षसों का अंत हुआ। व्यासपीठ की आरती विधायक गायत्रीराजे पवार, विधायक प्रतिनिधि भरत चौधरी, अभा ब्राह्मण महासंघ अध्यक्ष पं. दिनेश मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष पं. संजय शुक्ला, पं. मधुसूदन शर्मा, पं. देवकीनंद समाधिया, छोटू पाण्डे, महेन्द्र व्यास, महेन्द्र स्थानक, नवीन सोलंकी, सुरेश सिलोदिया, देवेंद्र नवगोत्री, रविकांत मिश्रा, सुभाष शर्मा मावा वाले सीहोर, सौरभ त्रिपाठी, विजय जाधव सहित भक्तों ने की। व्यास पूजन महेश व्यास, जगदीश व्यास सुरेश व्यास ने किया। महाराज श्री ने अहिल्या उद्धार प्रसंग का मार्मिक चित्रण करते हुए बताया कि कैसे गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बनी अहिल्या माता को श्रीराम के चरण स्पर्श से पुन: जीवन प्राप्त हुआ। यह प्रसंग भगवान की करुणा और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का प्रतीक बताया गया। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ प्रभु श्रीराम का गुणगान किया। श्री व्यास ने बताया कि यह पावन कथा 22 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5.30 बजे तक चलेगी।

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