कलेक्टर श्री सिंह ने जल संरक्षण की दृष्टि से सम्पूर्ण जिले में नलकूप खनन प्रतिबंधित रहेगा
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कोई भी व्यक्ति किसी भी जल स्त्रोत से सिंचाई के लिए जल उपयोग नहीं करेगा
देवास, 26 मार्च 2026 [शकील कादरी] कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री ऋतुराज सिंह ने जिले में संभावित घरेलू/पेयजल संकट से निपटने एवं आमजन सहित पशु-पक्षी आदि की तत्संबंधी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 में प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए देवास जिले को "जल अभावग्रस्त क्षेत्र" घोषित कर सभी जल स्त्रोतों तथा बांध, नदी, नहर, जलधारा, नालाबंधान, नलकूप या कुओं से किसी भी साधन में सिंचाई करना प्रतिबंधित किया है। उन्होंने जिले में स्थित समस्त जल स्त्रोतों में संग्रहित जल को "पेयजल एवं घरेलू" उपयोग के लिए सुरक्षित करने के लिए आदेश जारी किए हैं।
कलेक्टर श्री सिंह ने आदेश जारी किए हैं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी जल स्त्रोत से सिंचाई हेतु जल उपयोग नहीं करेगा। जल संरक्षण की दृष्टि से सम्पूर्ण जिले में नलकूप खनन प्रतिबंधित रहेगा! जिले की राजस्व सीमा क्षेत्र में नलकूप/बोरिंग मशीन द्वारा किसी भी प्रकार का खनन नहीं किया जावेगा। वर्तमान जल स्त्रोतों से पेयजल / घरेलू या निस्तार प्रयोजन को छोड़ अन्य किसी प्रयोजन हेतु भी जल उपयोग प्रतिबंधित होगा। आवश्यक होने पर अनुभाग अंतर्गत संबंधित "अनुविभागीय अधिकारी राजस्व/ अनुविभागीय दण्डाधिकारी किसी क्षेत्र में नल जल योजना न होने अपेक्षित स्थान के आस-पास हैण्डपम्प कुओं न होने अपेक्षित स्थान से 150 मीटर के रेडियस में नलकूप या कुआं न होने, अन्य पेयजल स्त्रोतों पर विपरीत प्रभाव न पड़ने आदि का परिक्षण पीएचई विभाग के सक्षम तकनीकी अधिकारी से करवाकर नलकूप खनन की अनुमति जारी कर सकेंगे। यदि नलकूप खनन की अनुमति प्रदान की जाती है तो आवेदक को निर्धारित फीस का भुगतान करना आवश्यक होगा। शासकीय संस्थाओं हेतु उपरोक्त प्रतिबंध लागू नहीं होंगे किन्तु तत्संबंधी कार्यों की जानकारी संबंधित विभाग द्वारा क्षेत्र में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व / अनुविभागीय दण्डाधिकारी को अनिवार्य रूप से प्रदान करना होगी। किसी जल स्त्रोत से पूर्व अनुमति प्राप्त "अन्य प्रयोजन" के जल उपयोग पर ये प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
यह आदेश दिनांक 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगा। जारी आदेशानुसार उक्त आदेश का उल्लंघन किए जाने पर म.प्र पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986, संशोधित अधिनियम 2002 एवं संशोधित 2022 के प्रावधान आकृष्ट होंगे। जिसके अंतर्गत आदेश का उल्लंघन सिद्ध पाये जाने पर प्रथम अपराध के लिए राशि 5,000 रुपए के जुर्माने से और पश्चात्वर्ती प्रत्येक अपराध के लिए राशि 10,000 रुपये के जुर्माने से या कारावास से जो 02 वर्ष तक का हो सकेगा दण्डनीय होगा।

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