जैसे पानी के बिना मछली का वैसे ही स्वास के बिना जीवन का अस्तित्व नहीं है - सद्गुरु मंगल नाम साहेब
देवास। सोना चांदी हो तो चोर ले जाए। तुम चोरों के धन को इकट्ठा कर रहे हो, संभाल रहे हो । थोड़ी सी चुक हुई कि चोर ले जाता है उसको। इसलिए सदगुरु कबीर साहब ने कहा है कि ऐसी आरती आतम ठोरा, जिसमें आत्मा उपलब्ध हो, वह गुरु शिष्य का संवाद है। गुरु शिष्य के संवाद से ही उपलब्ध होगा और सब तो कहीं भी मिल जाएगा। जो सब घमंड का और चोरों का धन है। गाड़ी, घोड़े, कार, बंगला यह सब चोरों का धन है। यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने बालगढ़ स्थित चूना खदान प्रार्थना स्थली पर व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि वह आरती जिसमें प्रेम का प्रकाश हो, आत्मा उपलब्ध हो। आगे कहा की संसार को नीरबेर होकर जीना सीखें सांस की तरह, श्वास कैसी निरबेर हैं। किसी से बेर भाव नहीं है। गरीब से अमीर से किसी से भेदभाव नहीं है। बचपन, जवानी, बुढ़ापा सबमें समान रूप से बह रही है। जो सबको संभाले बैठा है उसको कोई नहीं संभालता। अरुप, अथाह अनाहदराता उसका रंग न सुगंध है, वह किसी को दिखाई नहीं देता, ना समझ में आता है। गुरु शिष्य के संवाद से जब संसार को निचोड़ कर देखा तो मूल चीज यही है, कि अभी सवार इसी वक्त संभल श्वास को। और वह स्वास जिसको संभालने के बाद दुनिया की सारी झंझटे समाप्त हो जाती है। श्वास एक सार वस्तु है। जैसे मछली पानी से अलग करने पर तड़प तड़प कर मर जाती हैं। वैसे ही स्वास से प्रेम हो जाए कि बिना सांस के कोई रह नहीं सकता। और स्वास के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। जैसे मछली पानी के बिना जी नही सकती वैसे ही सांस के बिना कोई जी नहीं सकता। तुम समझो या मत समझो। लेकिन तुम्हारा अस्तित्व तुम्हारा सांस ही है। लेकिन तुम्हें ध्यान ही नहीं। तुम सिर्फ सांसारिक पद प्रतिष्ठा धन माया में उलझे पड़े हो। इस दौरान साध संगत द्वारा सद्गुरु मंगल नाम साहेब को पुष्माला पहनाकर व नारियल भेंट कर आशीर्वचन लिए। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।

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