रामायण हमें सिखाती है कि जीवन में सत्य, धर्म, त्याग, मर्यादा और करुणा का पालन कैसे करना चाहिए - पं. श्री ओमप्रकाश चतुर्वेदी
देवास। परशुराम वाटिका गार्डन, गंगानगर में चल रही श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. ओमप्रकाश चतुर्वेदी ने कथा व्यास से भगवान श्रीराम के अवतार की भूमिका और उनके जन्म से जुड़े प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से श्रीराम के चरित्र और उनकी लीलाओं का श्रवण किया। पं. चतुर्वेदी ने कहा कि हज़ारों वर्षों से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का आधार रही रामकथा में रामायण की महिमा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, आदर्श आचरण और धर्म के मार्ग को दिखाने वाला महान ग्रंथ है। रामकथा के प्रारंभ में जब मंगलाचरण किया जाता है, तब विशेष रूप से संत कवि गोस्वामी तुलसीदास जी की स्तुति का भी बड़ा महत्व बताया जाता है। आयोजक सुरेश चंद्र व्यास (सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री, नगर निगम देवास) ने बताया कि कथा श्रवण करने हेतु बडी संख्या में भक्तजन कथा स्थल पर पहुंच रहे है। कथा के दौरान सुमधुर भजनों की प्रस्तुति व रामकथा की सचित्र वर्णन कलाकारों द्वारा दिया जा रहा है। जिस पर भक्त मंत्रमुग्ध हो रहे है। व्यासपीठ की आरती रामेश्वर दायमा, राधाकृष्ण यादव, टीपी तिवारी, राजेन्द्र व्यास, गोपाल पटेल भेरूंदा, संजय व्यास, दिलीप शर्मा, ममता शर्मा, आरएस केलकर, ज्योतिषाचार्य भट्ट साहब, महेश व्यास, जगदीश व्यास सुरेश व्यास, सहित अन्य भक्तों ने श्रद्धा के साथ की। महाराज श्री ने आगे कहा कि रामकथा का उद्देश्य केवल कथा सुनाना नहीं होता, बल्कि श्रोताओं के मन में भक्ति, सदाचार और मर्यादा की भावना जगाना भी होता है। इसी कारण कथा की शुरुआत में मंगलाचरण किया जाता है, जिससे वातावरण पवित्र और मंगलमय हो जाता है। मंगलाचरण में भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान शिव, गुरु और संतों के साथ-साथ गोस्वामी तुलसीदास जी का स्मरण किया जाता है। रामायण को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पूजनीय ग्रंथ माना जाता है। इसमें भगवान राम के जीवन के माध्यम से आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श राजा और आदर्श पति का स्वरूप प्रस्तुत किया गया है। रामायण हमें सिखाती है कि जीवन में सत्य, धर्म, त्याग, मर्यादा और करुणा का पालन कैसे करना चाहिए। मंगलाचरण में भगवान श्रीराम, सीता माता, लक्ष्मण, हनुमान जी, भगवान शिव और गुरु की वंदना की जाती है। यह माना जाता है कि इनके आशीर्वाद से कथा बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न होती है। मंगलाचरण में तुलसीदास जी की स्तुति इसलिए की जाती है क्योंकि वे भगवान राम के महान भक्त और रामकथा के अमर गायक माने जाते हैं। श्री व्यास ने बताया कि यह पावन कथा 22 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5.30 बजे तक चलेगी। आयोजन समिति ने क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीराम कथा का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

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