Header Ads Widget

Responsive Advertisement

Recent Updates

6/recent/ticker-posts

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से बादल राजपूत का डॉक्टर बनने का सपना हुआ साकार, मिली 33.45 लाख की सहायता ------------योजना का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव को दे रहे हैं धन्‍यवाद

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से बादल राजपूत का डॉक्टर बनने का सपना हुआ साकार, मिली 33.45 लाख की सहायता
------------
योजना का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव को दे रहे हैं धन्‍यवाद
     देवास, 21 मई 2026 [शकील कादरी] पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना होनहार विद्यार्थियों के करियर को संवारने में मील का पत्थर साबित हो रही है। इसी क्रम में, अमलतास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस देवास में चिकित्सा शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र बादल राजपूत को विभाग द्वारा योजना के तहत 33 लाख 45 हजार 827 रूपये की पूर्ण शिक्षण शुल्क राशि छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान की गई है। डॉ. बादल राजपूत मूल रूप से शिंदे की छावनी  जिला ग्वालियर के निवासी है। योजना का लाभ मिलने पर वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव को हृदय से धन्‍यवाद दे रहे हैं। इस छात्रवृत्ति ने न केवल उनके परिवार के वित्तीय बोझ को दूर किया, बल्कि उन्हें पूरी एकाग्रता और लगन के साथ अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने में मदद की।

     अपनी सफलता और छात्रवृत्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. बादल राजपूत ने कहा, "इस छात्रवृत्ति ने उनके परिवार के बड़े आर्थिक बोझ को पूरी तरह कम कर दिया है। शासन की इस मदद से बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा मिली।  अमलतास इंस्टीट्यूट से अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. बादल राजपूत वर्तमान में मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित 'सिंयोधा'  शासकीय चिकित्सा केंद्र में बॉन्डेड चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं।

     सहायक संचालक पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण/विमुक्त घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु समुदाय विकास देवास ने बताया कि विभाग द्वारा प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के होनहार विद्यार्थियों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिया गया है। राज्य शासन के नए नियमों के तहत, राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा के आधार पर शासकीय अथवा निजी मेडिकल महाविद्यालयों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले पिछड़ा वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों को विभाग द्वारा पूर्ण शिक्षण शुल्क का भुगतान किया जाएगा। योजना के तहत लाभान्वित होने वाले डॉक्टरों के लिए राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करने हेतु 'मेधावी छात्र योजना' के समान बॉन्ड की शर्तें भी लागू की हैं,  जिसके तहत सरकारी कॉलेजों से शिक्षित डॉक्टरों को अनिवार्य रूप से 02 वर्ष तक राज्य शासन द्वारा निर्धारित ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देनी होंगी। इसके लिए उन्हें 10 लाख रुपये की बॉन्ड राशि का अनुबंध संबंधित प्राधिकारी के पास निष्पादित कर जमा करना होगा। निजी कॉलेजों से शिक्षा प्राप्त करने वाले डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा की अवधि 05 वर्ष निर्धारित की गई है। इन छात्रों को 25 लाख रुपये की बॉन्ड राशि का अनुबंध निष्पादित करना होगा।

Post a Comment

0 Comments

Join Our WhatsApp Group? for latest and breaking news updates...
Click here to join the group...