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प्रेम इस सांसारिक जगत के लिए अनमोल उपहार है...भागवत भूषण पंडित सिद्ध शरण पाठक

प्रेम इस सांसारिक जगत के लिए अनमोल उपहार है...भागवत भूषण पंडित सिद्ध शरण पाठक 

देवास। ईश्वर द्वारा प्रदत्त  प्रेम इस सांसारिक जगत के लिए अनमोल उपहार है। इस दिव्य प्रेम की सत्ता से ब्रम्हांडीय सत्ता जगमगा रही है। श्रीमद् भागवत  पुराण श्रीकृष्ण और गोपियों के पवित्र और निर्मल प्रेम  द्वारा इसकी प्रतिष्ठा में अद्वितीय है। श्रीमद् भागवत  में  वर्णित महारास का  सौंदर्य इतना  अद्भुत  है कि  इसका  रसपान करने के लिए साक्षात  शिव  भी पधारते हैं। 
इसी प्रेम रस  की  दिव्य  प्रतिष्ठा में, हमारे  इस  कलिकाल में भक्तिमती मीरां राजस्थान में जन्मीं यह  कहते हुए कि 
 मेरो नाम बूझी मत  लीज्यो
मैं हूं प्रेम  दिवानी 
अक्षुण्ण कृष्ण प्रेम रस की धार में मीरां अमिट हैं। यह विचार स्थानीय लक्ष्मीपुरा  में चल रही श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान व्यास पीठ  से भागवत भूषण पंडित सिद्ध शरण पाठक दतिया वाले ने व्यक्त किए  उन्होंने आगे कहा कि सांसार  वासनाओं से भरा हुआ है। प्रेम में उपासन  तो मोह  में वासना होती है।  प्रेम में दूसरे को सुख देने की भावना होती है, इच्छा होती है और मोह  में दूसरे से सुख लेने की इच्छा और भावना  होती है। परमात्मा की प्राप्ति जीवात्मा प्रेम के द्वारा ही कर सकता है।। प्रेम मीरा ने किया और इस  सांसारिक जगत को  प्रेम का संदेश दिया है। परमात्मा से प्रेम करना है, तो शबरी और मीरा जैसा करो। मीरा ने राजपाट, परिवार सबका परित्याग कर दिया, कि मेरो  तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई, जाके सिर  मोर मुकुट मेरो पति सोई। सत्य यही है की आत्मा के पिता और पति परमात्मा ही है। आगे कहा कि रुक्मणी लक्ष्मी स्वरुप है। राजा भीष्मक ने उनका द्वारकाधीश के साथ वरण  नहीं किया।तो द्वारकाधीश ने हरण किया।  राधा भक्ति हर हर ज्ञानम राधा रानी भक्ति स्वरूप है और रुक्मणी लक्ष्मी स्वरूप राधा रानी आदि शक्ति  है। उन्होंने आगे कहा कि अगर हम अपना धन सत्कर्म में नहीं लगते हैं सभी उपयोग  नहीं करते हैं तो फिर धन की तीन गति होती है। दान, भोग और नाश। इस दौरान पंडित सिद्ध शरण पाठक द्वारा  तेरी बांसुरी पे  जाऊं बलिहार रसिया में तो नाचूंगी तेरे दरबार रसिया जैसे एक से बढ़कर एक भक्ति गीत की प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूठ है। कृष्ण रुक्मणी विवाह आज बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। कृष्ण रुक्मणी को श्रद्धालु ढोल नगाड़े के साथ आतिशबाजी करते हुए कथा स्थल पर लाए। कथा पंडाल में आते ही कृष्ण रुक्मणी पर श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर जोरदार  स्वागत किया गया।माता बहनों ने एक दूसरे को हल्दी लगाकर श्री कृष्णा रुक्मणी विवाह की रस्म पूरी की। श्रद्धालुओं द्वारा फूलों की होली खेली गई।आयोजक मंडल के गौरव निधि सुर्वे, समाजसेवी प्रवीण संगीता भावसार, सिंधु सुर्वे  एवं अतिथियों ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना कर महा आरती की। सैकड़ो सैकड़ो धर्म प्रेमियों ने  कथा श्रवण कर धर्म लाभ लिया।

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