श्री गीत चरित्र की प्रभावी प्रस्तुति
देवास। मराठी कवि ग.दि.माडगूळकर लिखित, सुधीर फडके द्वारा संगीतबद्ध और सुमधुर स्वर में गाये गीत रामायण (जिसमें रामायण प्रसंगों को गीतों के माध्यम से बताया गया है) का मराठी साहित्य और संगीत में एक अति विशिष्ट स्थान है। कुछ इसी आधार पर श्री गुरु चरित्र ग्रन्थ के 52/53 अध्यायों के कुछ चुनिंदा अध्यायों के सार को गीत संगीत के माध्यम से संत श्री नाना महाराज तराणेकर संस्थान इंदौर के संजय तराणेकर (पूज्य श्री नाना महाराज के पौत्र) ने प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। आपके साथ दीक्षा सुपेकर, मानसी तराणेकर ने गायन में सहयोग किया। विवेक क्षीरसागर ने तबले और विवेक प्रचंड ने झांझ पर संगत की। निवेदिका छाया तराणेकर थी ,जिन्होंने प्रत्येक प्रस्तुति की बड़ी प्रभावी भूमिका श्रोताओं को समझाई। संजय ने पूज्य श्री नाना महाराज के कई प्रसंग भी सुनाए ,श्रोताओं ने कार्यक्रम को खूब सराहा। कार्यक्रम के अंत में कलाकारों का सत्कार श्रीफल और दुपट्टे से अनंत पुराणिक, प्रमोद नाईक, सुलोचना बेलापुरकर, शिखा धोडपकर ने किया। अनिल बेलापुरकर गुरुजी ने प्रमुख गायक संजय तराणेकर का सत्कार किया। कार्यक्रम संचालन दीपक कर्पे ने किया।
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