देवास। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में ही युवा सफल नेतृत्व कर सकता है। जब सीता माता की खोज के लिए वानरराज सुग्रीव के निर्देशन में दक्षिण क्षेत्र की कमान युवराज अंगद को दी गई तो प्रभु राम ने अंगद के साथ सेना में सबसे वृद्ध बुद्धिमान सेनापति जामवंत एवं हनुमान जी को भेजा जिनकी मुलाकात जटायु के भाई वृद्ध सम्पाती से हुई जिसने रावण द्वारा सीता माता को ले जाने का पता बताया। लंका तक पहुंचने के लिए सो योजन समुद्र को पार करने का सामर्थ्य किसी में नहीं दिखा तब हनुमान जी को उनकी शक्ति से परिचय सबसे बुजुर्ग जामवंत ने कराया था। जो परिवार अपने बुजुर्गों के मार्गदर्शन में चलता है उस परिवार में हर समस्या का हल मिल जाता है। भोजन से शरीर तृप्त होता है और भजन से आत्मा तृप्त होती है भजन आत्मा का श्रृंगार है और शरीर का तेज है।
गुरु बनाने से नहीं गुरु के वचनों पर चलने से उद्धार होगा
गुरु के वचनों पर शबरी ने 80 वर्षों तक प्रभु राम के दर्शन की प्रतीक्षा की थी गुरु के वचनों पर विश्वास का प्रतिफल था कि शबरी को भगवान के दर्शन हुए। शबरी ने राम को झूठे बेर नहीं खिलाए थे शबरी अपने राम के लिए जब वन में बेर चुनने जाती थी तब पेड़ों से गिरे बेर और फलों को चखती थी जिस पेड़ के बेर मीठे होते थे शबरी उनको चुन कर नित्य लाती थी कोई भी भक्त अपने भागवान को झूठा भोग नहीं लगाते है। पर नारी का अपहरण करने वाला भगवान का सबसे बड़ा शत्रु होता है राम ने बाली का वध किया उसका मुख्य कारण था बाली ने अपने भाई सुग्रीव की पत्नी का अपहरण किया। रावण के वध का कारण भी पर नारी का अपहरण करना है। जिसका जीवन शांत हो वो सुंदर है जिस कांड में भक्त हनुमान पर राम की कृपा हुई और हुनमान जी के काम राम के लिए हुए है वो सुंदर कांड है। इसलिए सुन्दर कांड पाठ करने वाले पर हनुमान जी कृपा होती है जिस पर हनुमान जी कृपा हो गयी उस पर राम की कृपा सदा बनी रहती है। हनुमान जी को अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता एवं अजर अमर होने का वरदान सीता माता ने अशोक वाटिका में दिया था जो हनुमान का भक्त होता है उसके जीवन में शोक नही आता। जिसको भाई ने त्याग दिया उसे भगवान ने अपना बना लिया है। त्रेता में विभीषण को रावण ने त्याग तो राम मिले, द्वापर में ध्रतराष्ट्र ने विदुर जी को त्यागा तो उनको कृष्ण मिले। रावण वध करके जब प्रभु राम अयोध्या गये तो सबसे पहले मां कैकई से मिले और अपने नए स्वरूप के जीवन के कारण उनको जननी कहा। राम कथा कोइ साधारण नहीं है यह जीवन की व्यथा और दशा दोनों को बदल देती है। आपको अपने परिवार में सुसंस्कार और आदर्शाे को स्थापित करना है तो राम कथा का श्रवण करें। यह आध्यात्मिक विचारों को रामायणाचार्य पंडित सुनील कृष्ण व्यास ने स्वर्णकार समाज महिला मंडल द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के विश्राम दिवस पर व्यक्त किये। आपने राम कथा में रामचरित मानस की आध्यात्मिक रचनाओं के रहस्यो को वर्तमान प्रासंगिकता से जोड़ कर जीवन दर्शन को बड़ी सरलता के साथ श्रोताओं के हृदय में उतारा । कथा समापन पर आयोजक मंडल सहित प्रत्येक श्रोता भावुक दिखाई दिया । कथा में पुलिस प्रशासन के पूर्व अधिकारी अशोक मंडलोई इंदौर, पूर्व महापौर रेखा वर्मा, पत्रकार अनिल सिकरवार आदि आरती में उपस्थित थे। दुर्गामाता भक्त मंडल ने अखंड भारत माता का चित्र भेंट कर गुरूजी का सम्मान किया। स्वर्णकार समाज महिला मंडल द्वारा इस राम कथा के सेतु मुकेश वर्मा एवं श्रीमती रेखा वर्मा का सम्मान कर धन्यवाद के साथ आभार माना। महिला मंडल अध्यक्ष राजश्री सोनी , डिम्पल सोनी एवं शकुंतला सोनी ने समाज के ट्रस्ट अध्यक्ष राधेश्याम सोनी, श्रीमती अरुणा सोनी सहित नवयुवक मंडल, एवं कार्यकारिणी एवं समाजजन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त कर सभी का सम्मान किया । कार्यक्रम का संचालन ऋषि राज सोनी ने किया।
गुरु बनाने से नहीं गुरु के वचनों पर चलने से उद्धार होगा
गुरु के वचनों पर शबरी ने 80 वर्षों तक प्रभु राम के दर्शन की प्रतीक्षा की थी गुरु के वचनों पर विश्वास का प्रतिफल था कि शबरी को भगवान के दर्शन हुए। शबरी ने राम को झूठे बेर नहीं खिलाए थे शबरी अपने राम के लिए जब वन में बेर चुनने जाती थी तब पेड़ों से गिरे बेर और फलों को चखती थी जिस पेड़ के बेर मीठे होते थे शबरी उनको चुन कर नित्य लाती थी कोई भी भक्त अपने भागवान को झूठा भोग नहीं लगाते है। पर नारी का अपहरण करने वाला भगवान का सबसे बड़ा शत्रु होता है राम ने बाली का वध किया उसका मुख्य कारण था बाली ने अपने भाई सुग्रीव की पत्नी का अपहरण किया। रावण के वध का कारण भी पर नारी का अपहरण करना है। जिसका जीवन शांत हो वो सुंदर है जिस कांड में भक्त हनुमान पर राम की कृपा हुई और हुनमान जी के काम राम के लिए हुए है वो सुंदर कांड है। इसलिए सुन्दर कांड पाठ करने वाले पर हनुमान जी कृपा होती है जिस पर हनुमान जी कृपा हो गयी उस पर राम की कृपा सदा बनी रहती है। हनुमान जी को अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता एवं अजर अमर होने का वरदान सीता माता ने अशोक वाटिका में दिया था जो हनुमान का भक्त होता है उसके जीवन में शोक नही आता। जिसको भाई ने त्याग दिया उसे भगवान ने अपना बना लिया है। त्रेता में विभीषण को रावण ने त्याग तो राम मिले, द्वापर में ध्रतराष्ट्र ने विदुर जी को त्यागा तो उनको कृष्ण मिले। रावण वध करके जब प्रभु राम अयोध्या गये तो सबसे पहले मां कैकई से मिले और अपने नए स्वरूप के जीवन के कारण उनको जननी कहा। राम कथा कोइ साधारण नहीं है यह जीवन की व्यथा और दशा दोनों को बदल देती है। आपको अपने परिवार में सुसंस्कार और आदर्शाे को स्थापित करना है तो राम कथा का श्रवण करें। यह आध्यात्मिक विचारों को रामायणाचार्य पंडित सुनील कृष्ण व्यास ने स्वर्णकार समाज महिला मंडल द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के विश्राम दिवस पर व्यक्त किये। आपने राम कथा में रामचरित मानस की आध्यात्मिक रचनाओं के रहस्यो को वर्तमान प्रासंगिकता से जोड़ कर जीवन दर्शन को बड़ी सरलता के साथ श्रोताओं के हृदय में उतारा । कथा समापन पर आयोजक मंडल सहित प्रत्येक श्रोता भावुक दिखाई दिया । कथा में पुलिस प्रशासन के पूर्व अधिकारी अशोक मंडलोई इंदौर, पूर्व महापौर रेखा वर्मा, पत्रकार अनिल सिकरवार आदि आरती में उपस्थित थे। दुर्गामाता भक्त मंडल ने अखंड भारत माता का चित्र भेंट कर गुरूजी का सम्मान किया। स्वर्णकार समाज महिला मंडल द्वारा इस राम कथा के सेतु मुकेश वर्मा एवं श्रीमती रेखा वर्मा का सम्मान कर धन्यवाद के साथ आभार माना। महिला मंडल अध्यक्ष राजश्री सोनी , डिम्पल सोनी एवं शकुंतला सोनी ने समाज के ट्रस्ट अध्यक्ष राधेश्याम सोनी, श्रीमती अरुणा सोनी सहित नवयुवक मंडल, एवं कार्यकारिणी एवं समाजजन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त कर सभी का सम्मान किया । कार्यक्रम का संचालन ऋषि राज सोनी ने किया।

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