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ईपीएफ 95 पेंशन 1 हजार से बढ़ाकर 7,500 रुपए करने की मांग, श्रमिकों ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

ईपीएफ 95 पेंशन 1 हजार से बढ़ाकर 7,500 रुपए करने की मांग, श्रमिकों ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

देवास। अखिल भारतीय इंजीनियरिंग एवं मेटल मजदूर महासंघ, भारतीय मजदूर संघ की अखिल भारतीय औद्योगिक इकाई द्वारा श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया के नाम कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा। महासंघ महामंत्री रामभान सिंह ने बताया कि ज्ञापन में महासंघ ने कर्मचारी पेंशन योजना-95 के अंतर्गत वर्तमान न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपए से बढ़ाकर 7,500 रुपए प्रतिमाह करने, साथ ही महंगाई राहत एवं चिकित्सा सुविधा का लाभ देने की मांग की। श्रमिकों का कहना है कि वर्तमान महंगाई के दौर में मौजूदा न्यूनतम पेंशन अपर्याप्त है, इसलिए इसमें सम्मानजनक वृद्धि आवश्यक है। ज्ञापन में सभी क्षेत्रों एवं सभी श्रमिकों के लिए श्रम कानूनों को बिना किसी छूट के लागू करने तथा श्रमिक हितों को प्राथमिकता देने की मांग की गई। साथ ही औद्योगिक संबंध संहिता-2020 एवं व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशाएं संहिता-2020 से संबंधित श्रमिकों की चिंताओं का समाधान करने की मांग रखी गई। महासंघ ने त्रिपक्षीय व्यवस्था के पुनरुद्धार एवं सुदृढ़ीकरण के साथ भारतीय श्रम सम्मेलन को तत्काल बुलाने की मांग की। विभिन्न त्रिपक्षीय समितियों का पुनर्गठन कर उन्हें प्रभावी एवं नियमित रूप से श्रमिक कल्याण के लिए कार्य करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी ज्ञापन में की गई। ज्ञापन में कर्मचारी भविष्य निधि में अनिवार्य अंशदान के लिए वर्तमान 15 हजार रुपए मासिक वेतन सीमा को बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की मांग की गई। इसी प्रकार कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अंतर्गत कवरेज की वर्तमान 21 हजार रुपए मासिक वेतन सीमा को बढ़ाकर 42 हजार रुपए करने की मांग रखी गई। इसके अलावा बोनस भुगतान अधिनियम-1965 के तहत बोनस की गणना के लिए निर्धारित वर्तमान 7 हजार रुपए की सीमा तथा पात्रता के लिए निर्धारित 21 हजार रुपए मासिक वेतन सीमा में भी वृद्धि करने की मांग की गई। महासंघ ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 एवं 21 की मूल भावना के अनुरूप योजना श्रमिकों एवं ठेका श्रमिकों को स्थायी करने की मांग की। साथ ही सामान्य भर्ती पर लगी रोक तत्काल हटाकर युवाओं को बिना अनिश्चितता और असुरक्षा के रोजगार की गारंटी देने की मांग भी उठाई गई। ज्ञापन में कहा गया कि अधिवेशन के दौरान विभिन्न उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के हितों की रक्षा एवं उनके कल्याण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा की। इस अवसर पर एड. जनार्दन पैठनकर, माखन सिंह राजपूत, सुभाष पंडित, शशिकांत वझे, पद्माकर जोशी, दयाराम काकोरिया, भूपत वर्मा, गिरधारीलाल शर्मा, जीआर कोलनकर, संतोष गौर, गोरीशंकर चौबे, बलराम प्रजापत, गंगराम मुजाल्दा, शैलेन्द्र चौधरी सहित बडी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।

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