माया होश में नहीं आने देती लोरी सुना करके सुला देती हैं... सद्गुरु मंगल नाम साहेब
देवास। जैसे बच्चे को मां लोरी सुनाकर सुला देती है। वैसे ही माया हमेशा लोरी सुना करके हमें सुला देती है। होश में नहीं आने देती है। अपने दायित्व को समझने नहीं देती अपनी जिम्मेदारियों को समझने नही देती है। माया भुला देती है अपने कर्तव्य को और अधिकार ढूंढने को कहती हैं। कि तुम तो यह हो तुम तो वह हो। अधिकारों के चक्कर में आदमी अपने दायित्व को भूल जाता है। इसलिए हमें माया से हमेशा सावधान रहना चाहिए। यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने सदगुरु कबीर सर्वहारा प्रार्थना स्थली चूना खदान बालगढ़ पर आयोजित गुरु शिष्य संवाद, गुरुवाणी पाठ में व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि जैसे किसी को मंत्री बना दिया मंत्री का दायित्व अगर नहीं निभाएगा।अगर तुम चौकीदार को कलेक्टर कहने लगे तो वह माया का स्वरूप है। माया मीठा घोल देती है, लोरी सुना करके सुला देती है। वह होश में नहीं आने देती। इसलिए माया से सावधान रहना चाहिए। अपने कर्तव्य और अपने अधिकार को छोड़ो अपने कर्तव्य से नाता जोड़ो। अपने कर्तव्य से ही अधिकार आते हैं। अपनी जिम्मेदारी से अपनी समझदारी ढूंढना चाहिए। अपने अधिकारों को नहीं मानना चाहिए कि मेरा अधिकार है।अधिकार तुम्हारे कर्तव्य का है और हम भूल जाते हैं हम अधिकारों को कर्तव्य समझने लगते हैं। इस दौरान सद्गुरु मंगल नाम साहेब का साध संगत द्वारा नारियल भेंट कर आशीर्वचन लिए।

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