मध्य भारत में यात्रा साहित्य उत्सव का प्रथम अनूठा साहित्यिक आयोजन हुआ देवास में,,
देश के ख्यातनाम यात्रावृत्तांतकार हुए शामिल,,,
-सुबह से शाम तक चलता रहा 'सफ़रनामा-यात्रा से शब्द तक,,,'
-इतने श्रोता पहुँचे कि सभागार छोटा पड़ गया, खड़े-खड़े सुनना पड़ा ,,
-देश की आत्मा इतिहास की पोथियों में गुम नहीं हो सकती, वह तो दन्तकथाओं और जनश्रुतियों में बसती है- डॉ. सोडानी,,,
देवास: 10 नवम्बर. [शकील कादरी] मध्य भारत में यात्रा साहित्य पर विधा केन्द्रित पहला अनूठा आयोजन देवास में हुआ. इसमें देश के नामी-गिरामी यात्रावृत्तांतकार शामिल हुए. सुबह से शाम तक 'सफ़रनामा-यात्रा से शब्द तक' के इस आयोजन में वक्ताओं ने यात्रा साहित्य के विविध पक्षों पर अपनी बात विस्तार से रखी. इतनी बड़ी तादात में श्रोता उन्हें सुनने पहुँचे कि सभागार छोटा पड़ गया. कुर्सियाँ कम पड़ गईं तो लोगों को खड़े-खड़े सुनना पड़ा.
मुख्य वक्ता के रूप में हिमालय की लगातार दुर्गम बीहड़ यात्राएँ कर उन्हें देश-दुनिया से परिचित कराने वाले लोकप्रिय यात्रा वृत्तान्त लेखक डॉ अजय सोडानी ने कहा कि मेरा स्पष्ट मानना है कि देश की आत्मा इतिहास की पोथियों में गुम नहीं हो सकती, वह तो दन्तकथाओं और जनश्रुतियों में बसती है. लोककथाएँ कभी झूठ नहीं बोलती, चाहे वे कितनी भी अविश्वसनीय ही क्यों न हो. उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि तथाकथित विकास ने हमारी प्रकृति और प्राकृतिक जीवन को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाया है.
नई दिल्ली से आए मुश्किल हालत में काम करने वाले दुनिया के दस ट्रेवल ब्लॉगर में शामिल प्रसिद्ध घुमक्कड़ और लेखक संजय शेफर्ड ने कहा कि यात्रा साहित्य को नए नजरिए से देखने-समझने की ज़रूरत है. 40 साल की उम्र में 24 देशों की यात्रा कर चुके शेफर्ड का मानना है कि घुमक्कड़ी संसार का सबसे बड़ा धर्म है, दुनिया की सर्वश्रेष्ठ वस्तु है. इसके लिए उन्होंने अपनी ऊँचे वेतन की नौकरी तक छोड़ दी. बालाजी टेलीफिल्म्स और बीबीसी ट्रेवल्स के लिए लिखने वाले शेफर्ड ने कहा कि सफलता के लिए कभी रास्ता नहीं बदलना चाहिए. असफलता या रास्ता बदलने के दो क़दम पीछे ही सफलता प्रतीक्षा कर रही होती है.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही विदुषी शास्त्रीय गायिका संजीवनी कान्त ने कहा कि ऐसे आयोजनों से यात्रा साहित्य लेखन को बल मिलता है और नए लेखकों को रोशनी मिलती है. इस अवसर पर यशोधरा भटनागर की किताब 'पथ के पन्ने' का विमोचन भी हुआ. पहले सत्र में वक्ता, लेखक और चिन्तक मनीष शर्मा, दूसरे सत्र में यात्रावृत्तांतकार महिमा वर्मा ने नए लेखकों के सवालों का जवाब देते हुए यात्रा साहित्य की बारीकियों से रुबरु करवाया.
मुख्य सत्र का मॉडरेशन करते हुए जाने-माने कथाकार मनीष वैद्य ने वक्ताओं से मौजूँ सवाल किए. उनके साथ शर्मिला ठाकुर, अमेय कान्त और रश्मि शर्मा ने मॉडरेशन की भूमिका निभाई. कार्यक्रम का संचालन तनिष्का वैद्य ने किया. आभार प्रदर्शन सुमन कुमावत ने किया. अतिथि परिचय नीलम दुबे, स्वागत भाषण मीनाक्षी दुबे तथा इकाई की गतिविधियों की जानकारी मंजू जैन ने दी. अतिथियों का स्वागत प्रकाश कान्त, सुनील चतुर्वेदी, हिमांशु कुमावत, संदीप भटनागर, उमेश अग्रवाल, शकुंतला दुबे, उर्वशी उपाध्याय, नरेश कानूनगो, सुधीर कुमार सोमानी, भावेश कानूनगो, सुधीर महाजन, श्रीकान्त तैलंग, शिरीन भावसार, बिंदु तिवारी तथा कविता नागर आदि ने किया.

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