अधिकृत वाहन विक्रेता ही कर सकेंगे पुराने वाहनों की बिक्री, परिवहन विभाग से अनुमति लेना जरूरी
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01 जनवरी 2026 से बिना रजिस्ट्रेशन व्यापार करना गैर कानूनी माना जायेगा, आर टी औ ने ऑटो डील संचालकों की बैठक लेकर दी जानकारी
देवास :24 दिसंबर 2025 [शकील कादरी] प्रदेश में पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री करने वाले ऑटो डील संचालकों को अब मध्यप्रदेश सरकार से अधिकृत डीलर के रूप में पंजीयन करवाना अनिवार्य हो गया है। अब पुरानी गाड़ियों का व्यापार करने वाले डीलरों को परिवहन विभाग से अनुमति लेनी होगी। मध्यप्रदेश सरकार ने धोखाधड़ी रोकने के लिये नए नियम (55A-55H) लागू कर दिए हैं। जारी किये गये निर्देशो के अनुसार 01 जनवरी 2026 से बिना रजिस्ट्रेशन व्यापार करना गैर कानूनी माना जायेगा।
शासन द्वारा जारी किये गये निर्देशो के पालन के लिये परिवहन कार्यालय में जिला परिवहन अधिकारी श्रीमती निशा चौहान द्वारा देवास शहर में संचालित समस्त ऑटो डील संचालकों की बैठक ली। जिसमें देवास में वर्षो से पुरानी वाहनों की खरीदी बिक्री करने वाले ऑटो डील संचालक उपस्थित हुए। बैठक में जिला परिवहन अधिकारी श्रीमती चौहान द्वारा समस्त ऑटो डील संचालकों को शासन के नियम एवं उनकी मंशा से अवगत कराया। साथ ही अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तथा उनके द्वारा लिये जाने वाले व्यापार प्रमाण-पत्र के विषय में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई।
परिवहन अधिकारी ने समस्त ऑटो डील संचालकों को निर्देशित किया कि सभी संचालक 31 दिसम्बर तक अनिवार्य रूप से व्यापार प्रमाण-पत्र संबंधी आवेदन एवं आवश्यक कार्यवाही पूर्ण करवाकर व्यापार प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लें। 01 जनवरी 2025 से वे किसी भी दशा में अनाधिकृत रूप से वाहन का क्रय-विक्रय नहीं कर पाएंगे। परिवहन विभाग द्वारा जांच के दौरान बिना व्यापार प्रमाण-पत्र के पुरानी वाहनों का क्रय-विक्रय करते पाए जाने पर नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी, जिसकी समस्त जवाबदारी संबंधी ऑटो डील संचालक की होगी।
क्या है नये नियम
सड़क परिवहन मंत्रालय की 2022 की अधिसूचना पर आधारित नियम अनुसार अब गाड़ी बेचने और खरीदने की पूरी प्रोसेस ऑनलाइन पोर्टल से होगी। इससे धोखाधड़ी और कागजी गड़बड़ियों पर लगाम लग सकेगी। नए प्रावधान अनुसार यदि कोई वाहन स्वामी अपना पुराना वाहन बेचना चाहता है तो उसे केवल अधिकृत डीलर के माध्यम से ही बिक्री करनी होगी। इसके लिये वाहन स्वामी को केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित फार्म 29 सी के माध्यम से संबंधित आरटीओ को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना देने के बाद संबंधित अधिकृत डीलर को उस वाहन का डीम्ड ऑनर (अस्थाई स्वामी) माना जायेगा और वहीं वाहन को आगे नए खरीदार को बेच सकेगा। जब तक नई बिक्री नहीं होती तब तक डीलर ही जिम्मेदार रहेगा। यह नियम खरीदार और विक्रेता दोनों की सुरक्षा के लिए हैं।
डीलर की जिम्मेदारी और अधिकार गाडी डीलर के पास जाने के बाद वाहन स्वामी फ्री हो जाएगे। अब गाडी के सभी दस्तावेज संभालना डीलर का काम होगा। गाडी की सुरक्षा और किसी भी हादसे की जिम्मेदारी डीलर की होगी। डीलर ही फिटनेस और पीयूसी के लिये रजिस्ट्रेशन कर सकेगा।
गाड़ी चलाने पर रहेगी कुछ पाबंदियां
अधिकृत डीलर गाड़ी को मनमर्जी से सड़क पर नहीं चला पाएगा। वह केवल तय कामों के लिये ही गाड़ी निकाल सकेगा। वह खरीदार को गाड़ी का ट्रायल देने के लिऐ इस्तेमाल करेगा। गाड़ी को सिर्फ सर्विस सेन्टर ले जाने की ही अनुमति होगी। फिटनेस या आरटीओ से जुड़े काम के लिये गाड़ी ले जाई जा सकेगी। अनावश्यक उपयोग पाए जाने पर डीलर पर कार्यवाही की जाएगी।
डीलर पंजीकरण के फायदे
पुरानी गाड़ी अधिकृति डीलर को बेचते ही पूर्व वाहन स्वामी की सारी कानूनी जिम्मेदारी तुरन्त खत्म हो जाएगी। दस्तावेज संभालना और हादसे की जिम्मेदारी अब डीलर की होगी। अब केवल मान्यता प्राप्त डीलरों को ही गाडी बेच पाएंगे, जिससे धोखाधड़ी की संभावना नहीं रहेगी।डीलर आपकी गाडी को अनावश्यक कार्यो के लिए नहीं चला पाएगा। सिर्फ ट्रायल के लिए ही गाड़ी निकाल सकेगा। बिना लाईसेंस पुरानी गाड़ी का धंधा करना गैर कानूनी होगा और खरीद बिक्री पर भारी जुर्माना लगेगा।

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