शिशु विहार स्कूल के 1986 बैच के विद्यार्थियों का मिलन समारोह संपन्न,,
देवास। शिशु विहार स्कूल देवास के 1986 बैच के विद्यार्थियों का अभूतपूर्व मिलन समारोह इंदौर में राकेश जाजू के रॉयल आर्किड गार्डन में संपन्न हुआ, जिसे इंदौर में रह रहे विद्यार्थियों द्वारा आयोजित किया गया था। आयोजन में संक्रांति, खेलकूद से लेकर स्कूल की क्लास भी बाकायदा अपनी उस जमाने की शिक्षिकाओं को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करके लगी। उस बैच के सभी विद्यार्थी अपना अमूल्य समय निकालकर उत्साह पूर्वक आए, संपूर्ण दिवस स्कूल के दिनों का आनंद लिया। क्लास में मस्ती भी की और सभी ने अपने बचपन की, स्कूल की आदतों को साक्षात फिर से जिया, उसके सहभागी बने। मुकेश दूर के शहर से आए और शिशुविहार की अपने जमाने की टाई भी लेकर आए तो शकील अपना स्कूलकालीन लंच बॉक्स दिखाकर सभी को उस युग में ही ले गए। इस पूरे आयोजन की संकल्पना भावना नेवासकर, हर्षा गोखले, शकील और नीरव चावला ने की थी जिसे हकीकत में राकेश जाजू और उनकी टीम ने उम्मीद से ज्यादा बेहतरीन तरीके से ऑर्गनाइज कर साकार कर दिखाया जो खुद भी इस विद्यालय के इसी बैच के विद्यार्थी थे सो उन्होंने पूरी शिद्दत से समारोह को अविस्मरणीय बना दिया। स्कूल के बाहर उस समय मिलने वाली कबिट की चटनी, इमली, बोर, जामफल आदि रखे और संक्रांति का समय है सो उड़ाने के लिए पतंगे भी रखी, तो शकील ने उस समय के लड़के और लड़कियों के यूनिफार्म के कट आउटस भी रखे, उसमें सभी ने अपना चेहरा लगाकर फोटो भी लिए, तो वहीं क्रिकेट, नींबू रेस, रस्सीखींच प्रतियोगिता भी मैदान में हुई जिसे उपस्थित शिक्षिकाओं ने भी बड़े चाव से देखा जो कि अब सेवा निवृत हो चुकी हैं और वे भी अपनी पुरानी यादों में खो गईं। विद्यार्थी सीमा शर्मा ने जानबूझकर चीटिंग की तो कुछ बच्चों ने वहां मौजूद दुबे मेडम से डांट भी दिलवाई और फिर सुबह का नाश्ता, खेलों के बाद राकेश ने सरप्राइजिंगली रॉयल आर्किड के हॉल को एक क्लास रूम में रुपांतरित कर दिया था जहां दोस्ती के और स्कूल जीवन के बड़े बड़े कट आउटस लगाए थे, बाकायदा टेबल बैंच और उस पर नोटपैड, पेन, बाटल रखे हुए थे और जैसे उस समय हमारे स्कूल बैठक होती थी उसी तर्ज पर बाएं में लड़के और दाएं में लड़कियों को बैठाया गया और फिर उपस्थित शिक्षिकाओं दुबे मेडम, सोनी मेडम, शाहपुरकर मेडम और दाउदखाने मेडम को सम्मानपूर्वक गाजे बाजे से अंदर लाया गया और उनके द्वारा सरस्वती देवी के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया, जिसमें पार्श्व में सरस्वती वंदना पर सीमा मनवानी ने नृत्य प्रस्तुत किया। तपश्चात मनीषा महाशब्दे और हर्षा ने गुरु ब्रम्हा गुरु विष्णू, तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं पिता हो और हम को मन की शक्ति देना, जो उस समय प्रार्थना करते थे क्लास के पहले, वो भी सभी से खड़े रहकर करवाई और बाद में 8/10 विद्यार्थियों के समूह बनाकर, शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। उस समय प्रिंसिपल रहे स्व. श्री पांडे सर का सम्मान उनके सुपुत्र दीपक पांडे को दिया गया और फिर शिक्षिकाओं ने सभी विद्यार्थियों को संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत तक सभी विद्यार्थी और शिक्षिकाएँ भी उन पुराने स्कूल के दिनों में पहुंच चुके थे सभी आनंदित और प्रफ्फुलित थे जिसका पूरा श्रेय राकेश जाजू को जाता है जिन्होंने तन-मन-धन और पूरी आत्मीयता से इसका बीड़ा उठाया था।
सभी शिक्षिकाएं भाव विभोर होकर खूब सारे आशीर्वाद सभी को देकर बोलीं वो हमारे शिक्षक जीवन का स्वर्णिम काल था और ये सब हमारे स्वर्णिम बच्चे, जो हमारी डांट और मार खाते थे, तब भी सम्मान ही करते हैं।
सलीम,अजय, इम्तियाज, गिरीश, दीपाली, रश्मि, ताहिरा, दीपक, सचिन, यशवंत, आलोक, उमेश, सोफिया और सभी विद्यार्थियों ने अपनी टीचर का आभार व्यक्त किया और कहा आपकी छड़ी की मार और डांट की वजह से ही सभ्य नागरिक बन पाए हैं जिस वजह से हम सबकी दोस्ती भी स्टेटस और जेंडर से परे एक पवित्र दोस्ती है जिसे अब चालीस वर्ष हो गए हैं और इस तरह यह दिन सभी के लिए ऐतिहासिक और यादगार दिन बन गया। डॉ. सचिन अधिकारी ने अपने बचपन की यादों को सभी साथ साझा किया। किसी की भी इन पलों को छोड़कर जाने की इच्छा नहीं हो रही थी पर फिर सभी इन अविस्मरणीय क्षणों को अपने दिल में संजो कर उत्साह उमंग से अपने दिलों में भरकर राकेश और उनकी पूरी टीम को इस अदभुद सफल आयोजन के लिए बधाईयां देकर रुखसत हुए, यह वादा करके कि पुनः अगले वर्ष एक दिन के लिए जिएंगे अपने बचपन को यूं ही। उक्त जानकारी सलीम अपना ने दी।

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