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अपनी कमाई सूखी रोटी में जो सुख मिलता है, वह पराई चुपड़ी में भी नहीं- सद्गुरु मंगलनाम साहेब

अपनी कमाई सूखी रोटी में जो सुख मिलता है, वह पराई चुपड़ी में भी नहीं- सद्गुरु मंगलनाम साहेब 
देवास। पराई चुपड़ी रोटी देखकर मन को मत ललचाओं, क्योंकि अपनी कमाई हुई सूखी रोटी में जो सुख मिलता है वह पराई चुपड़ी में भी नहीं मिल सकता। पराई चुपड़ी देखकर लोग गुलामी करने लग जाते हैं। एक-दूसरे के विचारों को झेलने लग जाते हैं जबरदस्ती, जो है ही नहीं। 
यह विचार सदगुरु कबीर आश्रम सर्वहारा प्रार्थना स्थली सेवा समिति मंगल मार्ग टेकरी द्वारा आयोजित गुरुवाणी पाठ गुरु शिष्य संवाद में सद्गुरु मंगलनाम साहेब ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो बनावटी विचार डालते हैं, जो बनावटी विचारधारा के है वह हमसे अच्छा रो लेते हैं। जिनका बाप नहीं मरा है, जिनका बाप मर जाता है वह रोना भूल जाता है, क्या रोये क्योंकि उसकी तो दुनिया ही लुट गई, लेकिन नकली लोग, सहानुभूति बटोरने वाले ढोंगी लोग ऐसे रोते हैं कि अपने को रोना नहीं आता उससे अच्छा रो लेते है। कहते है कि आपकी टोपी, पगड़ी देखकर मुझे रोना आ रहा है, पलंग देखकर रोना आ रहा है, जिसका बाप मरा उसको होंश ही नहीं रहता की अपना बाप मरा है उनको होश नहीं है। असली रोना तो  उनको आ रहा है औ रो नहीं पा रहे हैं, क्योंकि उनका तो कंठ भर जाता है, उनकी तो दुनिया लुट गई है। वह किससे कहे कोई अपनी बात। पिता के जाने के बाद कौन अपना है। अपनापन जब खो गया तो आदमी चुप हो गया। आगे कहा कि एक आदमी को किसी कारण लोग बाजार में बहुत मार रहे थे, लेकिन वह रो नहीं पा रहा था। जब उसका बाप सामने आ गया तो रोने लगा। लोगो ने कहा जब इतनी देर से मार रहे थे तो क्यों नहीं रो रहा था। उसने कहा मुझे अपना कोई दिख नहीं रहा तो क्या रोऊँ। वैसे ही इस सांसारिक भवसागर में अपना सद्गुरु जब अपने साथ आएगा, मिलेगा तो सारा रोना-धोना खत्म हो जाएगा। वह आपको सब दुखों से पार निकाल देगा। आप रोना भूल जाओगे। आनंद की बरसात हो जाएगी। रूखी सूखी खाकर ठंडा पानी पी। इससे भी आवश्यकता जीवन में शांति होती है। गरम रोटी खाने के चक्कर में लोग भटकते फिर रहे, दुनिया के गुलाम बने फिर रहे है, उन्हें कभी शांति नहीं मिल सकती। शांति आएगी धीरज और ठंडी रोटी से। अपनी कमाई सूखी रोटी से। लोग जल्दी में गरम-गरम खा रहे और संसार में भटकते फिर रहे हैं। पराई  चूपड़ी  पाकर  के लोग दुख पा रहे हैं। अपनी कमाई सूखी रोटी खाने वाला  हर बात को समझ लेता है और उसी में सारा सुख समाया हुआ है। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी 

 

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