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सच्चा भक्त कभी सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होता - संत प्रभावती जी,,मानव उत्थान सेवा समिति आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में श्री सतपालजी महाराज की शिष्या ने कहा

सच्चा भक्त कभी सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होता - संत प्रभावती जी
मानव उत्थान सेवा समिति आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में श्री सतपालजी महाराज की शिष्या ने कहा

देवास। सद्गुरु के प्रति श्रद्धा और विश्वास जीवन की दशा और दिशा दोनों बदल देती है। जो गुरु के बताएं मार्ग पर चलता है वही ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकता है। श्रीमद् भागवत जहां होती है, वहां तीर्थाे का कुंभ होता है। भागवत में सत् चित् आनंद के दर्शन है। ये सत्संग विचार बालाजी नगर स्थित मानव धर्म मंदिर में आयोजित साप्ताहिक सत्संग के दौरान श्री सतपाल जी महाराज की शिष्या प्रभावती जी ने कही। उन्होंने कहा कि संसार की बातें आपको बिखेरती और सत्संग की चर्चा आपको निखारती है। आप जितनी बार सत्संग सुनेंगे उतना ही भक्ति के रस का आनंद प्राप्त करोगे। सत्संग एक ऐसा अमृत है जो सिर्फ मनुष्य को मिल सकता है। तप से ईश्वर की भक्ति मिलती है, सुविधा से नहीं। सुविधा को प्राप्त करने वाला स्वार्थी होता है।   बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं संबोधित करते हुए साध्वी जी ने भजन - हो चाकर राख लो सतगुरुजी थारो बहुत बड़ो दरबार चाकर राख लो.... की मधुर प्रस्तुति पर उपस्थित गुरु भक्त झूम उठे। संतश्री ने कहा भगवान आनंद के समुद्र और सुख की राशि है। इसलिए जो भक्त उनका सुमिरन,स्मरण और ध्यान करता है, उसके हृदय और आत्मा में प्रभु आनंद के रूप में प्रकट होते हैं। यही कारण है कि सच्चा भगवत भक्त सदैव आनंदित और प्रफुल्लित रहता है। भगवान करुणा सिंधु है, इसलिए वह भक्त के हृदय में करुणा के रूप में प्रकट होते हैं। वे प्रेम के सागर हैं, वे भक्त के भीतर प्रेम के रूप में प्रकट होते हैं। वे ज्ञान स्वरूप है, इसलिए भक्त के हृदय में ज्ञान के रूप में उदित होते हैं। ज्ञान के प्रकट होते ही उसे नित्य-अनित्य, सत्य-असत्य का बोध होने लगता है। तब उसके हृदय में समस्त जीवों के प्रति करुणा और प्रेम की भावना विकसित होती है। वह प्रत्येक जीव में भगवान के स्वरूप का दर्शन करता है और जीव सेवा को ईश्वर सेवा मानता है। ऐसी अवस्था में वह संपूर्ण ब्रह्मांड को परमात्मा की साकार अभिव्यक्ति के रूप में देखने लगता है। वह अपने कर्तव्यों के माध्यम से इस विराट रूप की उपासना करता है। भगवान भक्त के हृदय में सत्य के रूप में प्रकट होते हैं, इसलिए सच्चा भक्त कभी सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होता और धर्म का परित्याग नहीं करता। उसे यह दृढ़ विश्वास हो होता है की सत्य ही ईश्वर है।
एक भक्त भौतिक जीवन को सफलता पूर्वक जीते हुए अंततः जीवन के परम लक्ष्य-मोक्ष और मुक्ति को प्राप्त करने में समर्थ होता है। इस मौके पर उपस्थित संत प्रेमा बाई ने गुरु महिमा ज्ञान-भक्ति, वैराग्य से ओतप्रोत मधुर भजनों के साथ आत्म कल्याणकारी सत्संग विचार रखें।
 विश्व शांति की प्रार्थना, आरती प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। समिति की ओर से माता राजराजेश्वरी जयंती के अवसर पर शासकिय जिला अस्पताल में मरीज को फल वितरण किया गया व उनके बैठने की सुगम व्यवस्था हेतु ब्रेंच भेंट की गई। डॉ. सतीश उईके बाल शिशु रोग चिकित्सक ने समिति का आभार प्रकट किया।

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