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शहर को नॉन-अटेन्मेंट सिटी घोषित करने के बाद प्रदूषण नियंत्रण पर मंथन,, एमएएनआईटी की स्टडी पर हुई विस्तृत चर्चा

शहर को नॉन-अटेन्मेंट सिटी घोषित करने के बाद प्रदूषण नियंत्रण पर मंथन,,
एमएएनआईटी की स्टडी पर हुई विस्तृत चर्चा
देवास। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली द्वारा वायु अधिनियम 1981 की धारा 18 (1) (बी) के अंतर्गत देवास शहर को नॉन-अटेन्मेंट सिटी घोषित किए जाने के बाद शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के परिणामों एवं पूर्व बैठकों के विषयों पर चर्चा के लिए जिला स्तरीय निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
एक्शन प्लान पर हुआ मंथन
नगर निगम के सभाकक्ष में महापौर श्रीमती गीता अग्रवाल, सभापति रवि जैन, विधायक एवं महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल, आयुक्त दलीप कुमार, नेता सत्तापक्ष मनीष सेन, स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष धर्मेन्द्रसिंह बैस की उपस्थिति में संपन्न हुई बैठक में शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने हेतु एक्शन प्लान पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के प्रमुख एजेंडा में मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल द्वारा शहर में की गई सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी पर विस्तार से चर्चा की गई। सर्वे टीम ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया कि शहर में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत कौन-कौन से हैं और किन कारणों से हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
महापौर गीता अग्रवाल ने बताया कि वायु गुणवत्ता में देवास शहर 3 से 5 लाख की आबादी में देश में प्रथम रहा है। स्वच्छ वायु के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में भी शहर को स्वच्छ हवा एवं वातावरण मिले।
उद्योगों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का मुख्य कारण
प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार देवास शहर की हवा में सबसे अधिक प्रदूषण उद्योगों से निकलने वाले धुएं एवं सड़कों पर उड़ने वाली धूल से हो रहा है। इसके बाद निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाले महीन कण भी प्रदूषण में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
सभापति रवि जैन ने अपने सुझाव में कहा कि उद्योगों से निकलने वाले धुएं पर वायु गुणवत्ता को लेकर प्लान तैयार करना होगा। देवास के उद्योग हमारे शहर की इकोनॉमी हैं। उद्योगों को कोई नुकसान न हो और वायु की गुणवत्ता बनी रहे, इसी प्रकार से वैज्ञानिक तरीके से हमें हल निकालना होगा।
तीसरे प्रमुख स्रोत के रूप में वाहनों के धुएं से भी प्रदूषण फैल रहा है। इसके अलावा अन्य छोटे-बड़े कारण भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं, जिन पर नियंत्रण की आवश्यकता बताई गई।
प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर चर्चा
बैठक में इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कदमों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण, सड़क धूल प्रबंधन, निर्माण स्थलों पर सख्त निगरानी तथा औद्योगिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण से वायु गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। इस बैठक में निगम उपायुक्त देवबाला पिपलोनिया, जाकिर जाफरी, आरती खेड़ेकर, एन.के.एप. कंसलटेंट से अनिल शर्मा, वर्षा जोशी, निगम प्र.कार्यपालन यंत्री इंदुप्रभा भारती, जगदीश वर्मा, प्र.स्वास्थ्य अधिकारी सौरभ त्रिपाठी, जितेन्द्र सिसोदिया, विश्वजीत सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं विभागीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।

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