देवास। आराध्य संत श्री श्री 1008 श्री गुरु टेकचंद जी महाराज के 278वें जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर दर्जी समाज देवास द्वारा समाज की धर्मशाला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमे स्वजातीय बंधु, मातृशक्ति, युवा वर्ग एवं बच्चे शामिल हुए। उलेखनीय है कि संत श्री टेकचंदजी महाराज का जन्म वैशाख पूर्णिमा विक्रम संवत 1805 सन् 1766 में देवास जिले के ग्राम आलरी में हुआ था, जन्म से ही धार्मिक प्रवृति के होने से 18 वर्ष की उम्र में गृह त्याग कर, कबीर पंथी गुरु परस राम जी से इंदौर जिले के कंपेल के पास ग्राम उंडेल में दीक्षा ग्रहण कर गुरु के सानिध्य मैं 12 वर्ष बिताए, उसके बाद उज्जैन जिले के ग्राम कड़छा में 18 वर्ष कठोर तप कर प्रभु श्री हरि के दर्शन प्राप्त किये और श्री हरि ने उन्हे अष्ट सिद्धि, नव निधि का ज्ञान प्रदान किया, उनके लिए स्वयं क्षिप्रा नदी ग्राम कड़छा में प्रकट हुई थी। 63 वर्ष की उम्र में संत श्री द्वारा शरद पूर्णिमा विक्रम संवत 1868 सन् 1811 में जीवित अखंड समाधि ले ली थी, समाधि लेने की खबर सुनकर गवालियर के राजा दौलत राव सिंधिया गुरु देव से मिलने आये और कृषि भूमि और 121 आम के पेड दान में प्रदान किये। समाधि से पूर्व ग्रामीणों ने गुरुदेव को पालकी मै बिठाया और ग्राम की परिक्रमा करवाई, गुरुदेव ने जनसमुदाय को जीवन जीने के लिए 16 उपदेश दिये। विगत 214 वर्षाे से प्रति शरद पूर्णिमा पर मेला लगता है और संपूर्ण भारत वर्ष से दर्जी समाज के लोग एकत्रित होते है। जन्म स्थल आलरी सहित विभिन स्थानों पर स्थित समाज की धर्मशाला में आज के दिन गुरुदेव की आरती उतारी जाती है। इसी क्रम में देवास स्थित समाज की धर्मशाला के मंदीर को गुब्बारो से सजाया गया, साथ ही रंगोली एवं दीपक लगाकर सजावट की गई। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बच्चो द्वारा लिख कर लाये गये श्री गुरु टेकचंद जी महाराज के द्वारा दिये गये उपदेशों एवं गुरू भाईयो के नाम के पेपर को एकत्रित किया गया। इनमे से गुरुदेव के उपदेश में प्रथम पुरुस्कार रीति ललित चावडा, द्वितीय स्वरा राहुल चावडा एवं तृतीय ईशा जाधव को प्रदान किया गया। गुरुदेव के भाईयो के नाम लिख कर लाये बच्चों में प्रथम पुरुस्कार रुद्र राजेंद्र परमार, द्वितीय अराध्या मनीष सोलंकी , तृतीय रीति ललित चावडा को अतिथियों एवं निर्णायक समिति द्वारा प्रदान किये गए। इस कार्यक्रम की निर्णायक विनीता सोलंकी एवं महिला ट्रस्ट सदस्य सीमा सोलंकी थे। कार्यक्रम के अतिथि समाज के वरिष्ठ मार्ग दर्शक रामेश्वर सोलंकी,कड़छा एवम देवास ट्रस्ट के संरक्षक दिलीप परमार, ,कड़छा ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं देवास ट्रस्ट के संवरक्षक सत्यनारायण सोलंकी, वरिष्ठ परामर्श दाता आनंदीलाल राठौर थे। इस अवसर पर श्री गुरु टेकचन्द जी महाराज के जीवन दर्शन पर आधारित प्रश्न अतिथियों एवं वरिष्ठ सदस्यों द्वारा, उपस्थित सदस्यों से पूछे गये,सही जवाब देने वाले को प्रोत्साहन पुरुस्कार प्रदान किये गए। ट्रस्ट अध्यक्ष मोहन परिहार द्वारा समाजजनो से गुरुदेव के उपदेशो को जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया गया, साथ ही बच्चो को संस्कार देने के लिए भी गुरुदेव का एक एक उपदेश जीवन जीने की कला सिखाता है इसलिए बच्चो को भी गुरुदेव के उपदेशो को सुबह,शाम एक बार जरूर पड़ना चाहिये एवं उनको जीवन मै आत्म सात कर उनका पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर गुरुदेव की पूजा अर्चना की गई एव आरती उतारी गई। अथितियो का स्वागत ट्रस्ट अध्यक्ष मोहन परिहार, उपाध्यक्ष बंशीलाल परिहार, महेश कोठारी, पुरूषोत्तम सोलंकी ने किया। कार्यक्रम में ट्रस्ट के ओमप्रकाश सोलंकी (ओमेक्स), दिलीप सोलंकी, जितेंद्र चावडा, राजेंद्र परमार, धर्मेंद्र सोलंकी, गणेश टेलर, रमेश जाधव, सहित सामाजिक बन्धु, युवा साथी, माता बहने एवं बच्चे उपस्थित थे। प्रसाद एवं स्वल्पाहार का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट सचिव शिरिष मेहता ने किया तथा आभा ट्रस्ट के सह सचिव राजेंद्र गुलाबचंद परमार ने माना।

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