हजरत काजी इरफान अहमद अशरफी साहब की सोऐम तीजे की फातेहा कल 15 मई को
देवास। हजरत काजी इरफान अहमद अशरफी चीफ शहर काजी सीनियर की सोऐम (तीजे) की फातेहा आज 15 मई को बाद नमाजे जुमा शाही जामा मस्जिद बड़ा बाजार देवास में होगी। काजी इरफान अशरफी के इंतकाल की खबर से शहर भर में फैले उनके अनुयायियों और अकीदतमंदों को गहरा सदमा लगा है। साथ ही साथ शहर की फिजा में यह खबर हवाओं के साथ फैली कि हर आंख आसुंओं से नम हो गई। सूफीवाद के प्रचारक, मानव सेवा और सामाजिक कल्याण, आपसी सौहार्द और भाईचारे के रक्षक, शिक्षा और शांति के मार्ग पर अग्रसर सभी धर्म और संस्कृति के लोगो को साथ लेकर चलने वाले गरीब, यतीमों और कमजोर वर्ग के लोगों को उपर उठाने की सोच रखने वाले इंसानियत और देशहित के लिए हमेशा समर्पित रहने वाले काजी इरफान एहमद दुनिया भर के इस्लामिक विद्ववानों की आंखों के वो तारे रहे। बिना किसी भेदभाव के अम्नो अमान के लिए अपना जीवन जीने वाली इस हस्ती का हमें छोड़कर जाना एक बड़ी क्षति है या यूं कहे कि एक सदी का अंत हो गया, एक चमकता हुआ आफताब गुरूब हो गया। जो बजाहिर तो नजर नहीं आता पर उनकी यादें हजारों लाखों दिलों में यूं ही रहेगी वो अपने चाहने वालों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगेे। शहर काजी हकीम निसार एहमद के बेटे और हाजी मुश्ताक बाबा कादरी के भतीजे जिन्होंने बुरहानपुर में तालीम हासिल की और फातेह अफ्रिका व एशिया हजरत मौलाना अब्दुर्रशीद अशरफी ने आपको अपना खलीफा नियुक्त किया और इस तरह आध्यात्मिक सूफी सम्प्रदाय से आपका गहरा ताल्लुक हुआ। खास रूप से सूफी चिश्ती अशरफी बुजुर्गो से आपको खूब आशीर्वाद प्राप्त हुआ। भूखे को खाना खिलाने का पैगाम समाज को सिखाया। आपके दस्तरख्वान पर हमेशा लोग खाना खाते, गरीब बेटियों की शादी, कमजोरों की छुपकर इमदाद करने वाली ये मुकद्दस हस्ती जिनके चाहने वालों में सिर्फ मुस्लिम समाज ही नहीं सभी धर्म के लोग शामिल है। जो आपसे मिलता वो आपका ही हो जाता, सादगी की एक तस्वीर, हंसता, मुस्कुराता चेहरा, जिनकी सोहबत में रहकर कईयों को जिंदगी जीने का दर्स मिला, बेबाकी और जिंदादिली सिखाने वाली ये महान हस्ती, जिन्हें देखकर खुदा की याद आ जाया करती थी, अल्लाह का जिक्र करने पर जोर देते और हमेंशा यूं कहते कि अल्लाह और उसके रसूल की बारगाह में गुनहगार न होना। बाकी सब चल ही रहा है आप सच्चे आशीके रसूल थे हमेशा यही तालीम देते कि दिल ऐसा रखो कि तुम बुजुर्गो की जूतियां सीधी करो और जिद ऐसी रखो कि कभी ताज उठाकर मत पहनो। ये सोच समाज को देने वाले शहर के हमदर्द इस दुनिया को छोड़कर अपने मालिके हकीकी से जा मिले। आपकी नमाजे जनाजा आपके फरजंदे अरजुमंद, हाफिजों कारी काजी नोमान एहमद अशरफी ने अदा कराई हजारों आशिकों के जन सैलाब के साथ लाइ ला हा इल्लल लाह की सदाओं के साथ आपको सुपुर्दे खाक किया गया।
मुझको दुनिया के अदीबों की कहानी ना सुना
मैरी आंख ने कलंदर की जियारत की है।
मालिक काजी इरफान एहमद अशरफी के दर्जातबुलंद करे।

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