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कोई भी धार्मिक अनुष्ठान यज्ञ हवन के बिना परिपूर्ण नहीं होता है.. पंडित सिद्ध शरण पाठक,, सांवरियो है सेठ म्हारी राधा जी सेठानी है कि भावपूर्ण प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूम उठे

कोई भी धार्मिक अनुष्ठान  यज्ञ हवन के बिना परिपूर्ण नहीं होता है.. पंडित सिद्ध शरण पाठक,, 

सांवरियो है सेठ म्हारी राधा जी सेठानी है कि भावपूर्ण प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूम उठे 

देवास। लक्ष्मीपुरा  में चल रही सात दिवसीय  श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर यज्ञ हवन में यजमानों द्वारा आहुतियां डाली गई। भागवताचार्य  पंडित सिद्ध शरण पाठक ने यज्ञ हवन के दौरान कहा कि कोई भी धार्मिक अनुष्ठान यज्ञ हवन के बिना परिपूर्ण नहीं होता है। मानव जीवन में यज्ञ को सर्वश्रेष्ठ कर्म माना गया है। प्राचीन हिंदू सनातन परंपरा से आधुनिक युग तक यज्ञ हवन मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग रहे हैं। हिंदू समाज में कोई भी शुभ कार्य हो तो उसमें यज्ञवन का होना अनिवार्य है चाहे बड़ा हो या छोटा सामान्य पूजा पाठ गृह प्रवेश हो या बच्चे का नाम संस्करण या शादी विवाह जैसी महत्वपूर्ण परंपरा बिना यज्ञ हवन के कोई भी परिपूर्ण नहीं होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जितनी भी परीक्षा होती हैं, समझ जाना प्रभु परमात्मा आपको अपने नजदीक बुला रहा है। गोपियों के अंदर भाव था, काम संसार का करती थी  और चिंतन भगवान का करती थी । लेकिन हम चिंतन संसार का करते है  भगवान का नहीं करते हैं। इसलिए हम दुखी रहते हैं। संसार में रहते हुए  भी अगर भगवान का चिंतन करते रहे तो भवसागर से पार हो जाओगे।  हिंदू समाज में कोई भी शुभ कार्य हो तो उसमें यज्ञ हवन का होना अनिवार्य है। इस दौरान पंडित सिद्ध शरण पाठक ने सांवरियो है सेठ म्हारी  राधा जी सेठानी है कि भावपूर्ण प्रस्तुति  पर श्रद्धालु झूम उठे।  भागवत जी की शोभायात्रा निकाली गई। आयोजक मंडल के गौरव निधि सुर्वे,  प्रवीण भावसार, दिनेश सांवलिया, ललिता सांवलिया, सिंधु सुर्वे, संगीता भावसार द्वारा  व्यास पीठ की  पूजा अर्चना  कर  महाआरती  की गई। शाम को भंडारे  का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ो धर्म प्रेमियों ने महाप्रसादी ग्रहण कर पुण्य लाभ लिया।


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