जब मन के सारे बंधन टूट जाते है तभी जीवात्मा का परमात्मा से वास्तविक मिलन होता है -पंडित सुनील कृष्ण व्यास
देवास। जहां एक का अंत होता है वह एकांत है वही भक्त के मन के एकांत में भगवंत की प्राप्ति होती है। जो ईश्वर से कोई डिमांड नहीं करता वो भक्त भगवान की दृष्टि में डायमंड होता है। रामायण में दो वाटिका का वर्णन है एक वैदेही की पुष्प वाटिका और दूसरी दशानन की अशोक वाटिका। पुष्प वाटिका में सीता जी को राम के दर्शन हुए थे मिलन की खुशी थी और अशोक वाटिका में श्रीराम से विरह का दुख था ।परमात्मा से मिलने के लिए मन में विश्वास लेकर भक्ति रूपी पुष्प वाटिका में जाना पड़ेगा तब प्रभु की प्राप्ति होगी , किंतु जब प्रभु के प्रति तनिक संदेह हुआ तो भक्त को अशोक वाटिका प्राप्त होती जहाँ रावण के त्रास का सामना कर प्रभु की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या करनी पड़ती है तब राम प्राप्त होते है प्रभु राम की कथा यही सिखाती है।
स्वभाव और श्रृंगार ही आकर्षण का कारक होता है। जिसके जीवन में सुंदर स्वभाव और श्रृंगार होता है उसका जीवन पुष्प वाटिका होती है। जानकी जी के स्वयंबर में धनुष यज्ञ की कथा परशुराम जी एवं पिनाक धनुष के अहंकार को नष्ट करने की भी कथा है धनुष अहंकार का प्रतीक है जिसे प्रभु राम ने शिव जी की आज्ञा से तथा जनक जी के संकल्प एवं प्रतिज्ञा का मान रखने के लिए गुरु विश्वामित्र जी की आज्ञा से तोड़ा था। और जब मन के सारे बंधन टूटते है तब ही जीवात्मा का परमात्मा का मिलन होता है। रामायण के इस सीता स्वयंबर के रहस्यमय आध्यात्मिक चित्रण को स्वर्णकार समाज महिला मंडल द्वारा पुरुषोत्तम मास में आयोजित श्रीराम कथा के पांचवे दिन रामायणाचार्य पंडित सुनील कृष्ण व्यास ने व्यक्त किए। कथा प्रसंग में माता अहिल्या, तड़का वध, श्रीराम एवं सीता जी विवाह के साथ भरत लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न जी के विवाह एवं अयोध्या से आई बारात का बहुत सुंदर चित्रण कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा में देवास विधायक गायत्री राजे पवार एवं कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष मनोज राजानी ने आकर व्यास पीठ से आशीर्वाद लिया एवं गुरु जी का सम्मान किया। इस अवसर पर सराफा व्यापारी एसोसिएशन से राधेश्याम सोनी ,दिलीप चौधरी तथा माहेश्वरी समाज की ओर से अध्यक्ष दिनेश एम भूतड़ा, उपाध्यक्ष कल्याण भूतड़ा, सचिव प्रदीप साहू, प्रचार मंत्री राजेंद्र मूंदड़ा ,साथ ही देवास एवं महिदपुर रोड के पोरवाल समाज से शिवकुमार संघवी, अशोक पोरवाल, विजय घाटिया, अंकित गुप्ता ,देवीलाल पोरवाल ने गुरु देव का सम्मान किया। व्यास पीठ की पूजा महिला मंडल अध्यक्ष राजश्री सोनी , सचिव डिम्पल सोनी , राजेश सोनी ,प्रदीप सोनी , मुकेश वर्मा, दीपचंद सोनी एवं महिला मंडल द्वारा की गयी। श्रीराम जानकी के विवाह की सुन्दर झांकी दिखाई गई जिसने श्री राम के रूप में मोहित सोनी एवं सीता के रूप में वर्षा सोनी,बाल्य राम एवं सीता के रूप में ओशिना एवं कोस्तुभी के सुन्दर स्वरूप ने सबका मन मोह लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्वर्णकार समाज सहित सर्व समाज की महिला एवं पुरुषों ने कथा का श्रवण किया। कथा में स्वागत संचालन शकुंतला राजेश सोनी किया।

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