संतों के दर्शन और आशीर्वचनों से श्रोता अनुग्रहित हुए,,
परमेश्वर प्राप्ति के तीन मार्ग ज्ञान,भक्ति और कर्म - भाऊनाथ महाराज (नासिक)देवास। श्री दत्त उपासक मंडल के सामूहिक गुरु चरित्र वाचन में संत समागम में इंदौर, नासिक , संकेश्वर पीठ ,देवास आदि स्थानों से पधारे संतों के दर्शन मंडल के एक ही मंच पर पाकर श्रोता अभिभूत हो गए। प्रातः ग्यारह बजे संतों का आगमन गीता भवन में प्रारंभ हुआ। श्रद्धेय भाऊनाथ महाराज और अनिल महाराज (नासिक),पूज्य शंकर भारती स्वामी महाराज, संकेश्वर पीठ, प. पू.महामंडलेश्वर श्री दादू महाराज ( श्री शनी महाराज संस्थान,इंदौर) श्री रेणुका माता संस्थान इंदौर के श्री प्रवीणनाथ पानसे महाराज, शेगाव के गजानन महाराज संस्थान,इंदौर की पू. बेहरे आई, इंदौर से ही पू.तैलंग महाराज, श्री राम शरणम् आश्रम देवास के इंदरसिंहजी नागर आदि संतों ने उपस्थित सैकड़ों श्रोताओं को आशीर्वाद ,दर्शन और आशीर्वचनों से अनुग्रहित किया।
पू.तैलंग महाराज ने कहा कि जीवन का उद्देश्य हमेशा सामने रहना चाहिए,प्रपंच करते हुए परमेश्वर की प्राप्ति का प्रयास करना चाहिए। पू.बेहरे आई ने 13 वें सामूहिक गुरु चरित्र वाचन हेतु सभी का अभिनंदन किया। 12 वर्षों में एक तप पूर्ण होता है,और वाचकों ने सतत 13 वर्ष वाचन कर यह तप पूर्ण किया है। पू. नागर महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी में आग्रह किया कि आज संसार को अध्यात्म की आवश्यकता है । हम प्रतिदिन अपने परिवार ,समाज और राष्ट्र के लिए और सनातन धर्म को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए धर्मग्रंथों का वाचन करें। पू.भाऊनाथ महाराज ने परमेश्वर प्राप्ति के तीन मार्ग बताए- ज्ञान, भक्ति और कर्म। मार्ग कोई भी हो पूर्ण समर्पण भाव परमेश्वर प्राप्ति के लिए अनिवार्य है। पू. प्रवीणनाथ पानसे महाराज ने कहा कि अधिक मास में जो अर्जित किया है वह राष्ट्राय स्वाहा इदं न मम ऐसा संकल्प करें तो अधिकमास सार्थक सिद्ध होगा।
पू.दादू महाराज ने भी सतत 13 वर्षों से वाचन को बड़े पुण्य का कार्य और इसे प्रभु की आज्ञा बताया। इसके लिए मंडल संस्थापक अनिल बेलापुरकर गुरुजी का अभिनंदन किया। अनिल महाराज (नासिक) ने दो भजनों की प्रस्तुति दी साथ है दरबार गुरु का तू भी आकर देख ले, मिलता है सबको यहां पर आजमा कर देख ले तथा अरे किती आनंद रे,सांगो सद्गुरू राया। पू.शंकर भारती स्वामी महाराज ने भी धर्मग्रंथों (भगवत गीता,रामचरित मानस,श्री गुरु चरित्र) के वाचन,निष्काम ,निस्वार्थ भक्ती और इसमें कड़े अनुशासन पर बल दिया। अनिल बेलापुरकर गुरुजी ने कार्यकर्ता,श्रोता,वाचकों और संतों का आभार व्यक्त किया। तत्पश्चात संतों का स्वागत विवेक बक्षी,नचिकेत मनोहर,सारंग लोटे उदय कस्तूरे, हेमंत व्यवहारे, सुलोचना बेलापुरकर, सुभाष महादाणे, सतीश पिसे, संजय जोशी ने किया। मंच व्यवस्था नागेश दौलताबादकर, दिलीप बाकरे ,सदाशिव जोशी ने बनाए रखी। सातों दिन भोजन व्यवस्था रोहित सुपेकर द्वारा की गई। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन दीपक कर्पे ने किया। आरती और महाप्रसाद के पश्चात सप्ताह के समाप्ति की घोषणा की गई।

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