साहित्य, संगीत और कलाएँ हमें मनुष्य बनाती हैं. इनमें परस्पर आवाजाही से हम समृद्ध होते हैं- प्रकाशकांत
देवास। अगर आपके पास संवेदना है तो फिर आप रचनात्मक हो सकते हैं यदि वह नहीं तो आप उसकी अंतर्दृष्टि को नहीं पकड़ सकेंगे। आपकी दृष्टि कला की है तो आपको दुनिया अलग तरह से खूबसूरत दिखती है. वही हमारे मनुष्य होने की निशानी है। इसके लिए कलाएँ छटपटाती भी हैं. साहित्य, संगीत और कलाएँ बेहतर दुनिया का स्वप्न देखती हैं. और हमें एक बेहतर मनुष्य बनाती हैं। हमें इनमें गहरे सरोकार, संवेदना और समाज को देखने-समझने की दृष्टि मिलती है। एक से दूसरी विधाओं में आवाजाही से हम रचनात्मक रूप से समृद्ध होते हैं। यह बात ख्यात कथाकार प्रकाश कान्त ने अभिरुचि ललित कला अकादमी और लिटरेचर क्लब देवास के साझा चार दिवसीय आयोजन जुगलबंदी के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कही। पद्मश्री पुराविद नारायण व्यास ने कला की प्राचीन परम्परा की बात करते हुए इसके लोक पक्ष पर बात की। काष्ठ शिल्पी सोहन जोशी ने कला और साहित्य के बीच आवाजाही को रचनात्मक और नवाचारी क़दम निरुपित किया। अमेय कान्त ने टैगोर, सत्यजीत रे, अमृतलाल वेगड़, नामचीन हस्तियों के उदाहरण देते हुए कला और साहित्य की जुगलबंदी को ज़रूरी बताया। इससे पूर्व कार्यक्रम की रूपरेखा मनीष शर्मा ने तथा कला और साहित्य के अंतर्संबंध पर आधार वक्तव्य मनीष वैद्य ने रखा। चित्रकला का सामान्य परिचय देते हुए इसमें इन फोकस, इमेजिनेशन, आउटलाइन्स, रंगों से परिचय, रंगों के प्रतीक, रंग योजना, बेस कलर, कैनवास और ड्राइंग शीट्स, पेंटिंग्स के माध्यम, बेलेंस, पेंटिंग की भाषा और उसका सौन्दर्य आदि पर कला अकादमी की सोनाली चौहान, जय प्रकाश चौहान, रोहित नंदाने, ज्योत्स्ना पाठक, मैत्रेयी सिंह, कृश, कृतिका सोनी, प्रेरणा सोलंकी आदि ने समूह चर्चा में विस्तार से बात की। कला और साहित्य के अंतर्संबंध पर समूह चर्चा में सुधीर महाजन, जयप्रकाश चौहान और चयन कानूनगो तथा प्रकृति से चित्रकला का जुड़ाव विषय पर रश्मि शर्मा और अमित पिठवे ने अपनी बात रखी। इसके बाद चित्रकला शिविर में सभी प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी प्रकृति आधारित पेंटिंग बनाई। लिटरेचर क्लब के साथियों ने अपना कविता पाठ किया। अतिथियों ने इस अवसर पर तैयार पेंटिंग्स की कला प्रदर्शनी को भी निहारा. सञ्चालन शांतनु बेहरे, शर्मिला ठाकुर, मंजू जैन और उर्वशी उपाध्याय ने तथा आभार प्रदर्शन मीनाक्षी दुबे, अपर्णा जैन, कृपाली राणा तथा दारा सिंह चंदेल ने किया। प्रतिवेदन पाठ अलका निगम, छाया कानूनगो, सुमन कुमावत, वंदना शर्मा तथा कविता सत्र का संचालन नीलम दुबे ने किया। आयोजन में विजय श्रीवास्तव,डॉ समीरा नईम, बहादुर पटेल, मनोज पवार, महेंद्रसिंह सोलंकी, ममता मालवीय, रामेश्वर पटेल, सुरेंद्रसिंह राजपूत, दिलीप निगम, भावेश कानूनगो, अंशुमन जैन सहित कई कला प्रेमी उपस्थित थे।

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