देवास। प्राउटिस्ट यूनिवर्सल द्वारा 25 मई से 29 मई 2026 तक आनंद नगर पुरुलिया के प्रउत भवन में पाँच दिवसीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर (एलटीसी) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। शिविर में भारत के विभिन्न समाजों से आए समर्पित सदस्यों ने भाग लिया और प्रउत दर्शन तथा उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग पर गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
हेमेन्द्र निगम काकू ने बताया कि कार्यक्रम का उद्घाटन आचार्य नभातीतानंद अवधूत(एसजी पीयू) तथा आचार्य रामेन्द्रानंद अवधूत (संेट्रल पीआरएस) द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में प्रउतवादी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए नैतिक एवं आध्यात्मिक नेतृत्व की आवश्यकता पर बल दिया। विभिन्न समाजों ( सामाजिक, आर्थिक इकाइयों) से आज प्रशिक्षुओं को सद्विप्र के गुणों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया, जिसे प्रत्येक प्राउटिस्ट के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुण माना जाता है। यह सत्र प्रशिक्षक आचार्य शिवानंद दानी जी द्वारा संचालित किया गया, जिन्होंने प्रउत के मूलभूत सिद्धांतों तथा एक समतामूलक और प्रगतिशील समाज के निर्माण में उनकी भूमिका को भी स्पष्ट किया। प्रउत की मूल संगठनात्मक संरचना, उसकी विभिन्न इकाइयों तथा कार्यप्रणाली को प्रख्यात प्रशिक्षक आचार्य सत्यव्रतानंद अवधूत ने विस्तारपूर्वक समझाया। समाज के विभिन्न स्तरों पर प्रउतवादी आदर्शों को लागू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थागत ढाँचे की स्पष्ट समझ प्राप्त हुई।
हेमेन्द्र निगम काकू ने बताया कि कार्यक्रम का उद्घाटन आचार्य नभातीतानंद अवधूत(एसजी पीयू) तथा आचार्य रामेन्द्रानंद अवधूत (संेट्रल पीआरएस) द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में प्रउतवादी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए नैतिक एवं आध्यात्मिक नेतृत्व की आवश्यकता पर बल दिया। विभिन्न समाजों ( सामाजिक, आर्थिक इकाइयों) से आज प्रशिक्षुओं को सद्विप्र के गुणों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया, जिसे प्रत्येक प्राउटिस्ट के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुण माना जाता है। यह सत्र प्रशिक्षक आचार्य शिवानंद दानी जी द्वारा संचालित किया गया, जिन्होंने प्रउत के मूलभूत सिद्धांतों तथा एक समतामूलक और प्रगतिशील समाज के निर्माण में उनकी भूमिका को भी स्पष्ट किया। प्रउत की मूल संगठनात्मक संरचना, उसकी विभिन्न इकाइयों तथा कार्यप्रणाली को प्रख्यात प्रशिक्षक आचार्य सत्यव्रतानंद अवधूत ने विस्तारपूर्वक समझाया। समाज के विभिन्न स्तरों पर प्रउतवादी आदर्शों को लागू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थागत ढाँचे की स्पष्ट समझ प्राप्त हुई।
एक अन्य महत्वपूर्ण विषय व्यवहारिक प्रउत-एप्लाइड प्राउट पर आचार्य पुण्येशानंद अवधूत ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रउत के व्यावहारिक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रउत व्यवस्था सिद्धांत, नीति, योजना और अंततः कार्यक्रमों के माध्यम से लागू होगी। साथ ही उन्होंने जनसाधारण में प्रउत के प्रति जागरूकता फैलाने तथा सामाजिक परिवर्तन के लिए संगठित आंदोलनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला। मीडिया सचिव मीतूसिंह दीदी ने बताया कि कार्यक्रम का समापन साधना, सेवा और त्याग के आदर्शों के प्रति प्रतिभागियों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और समर्पण की भावना के साथ हुआ।

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