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बद्रीनाथ धाम में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, देवास से पहुंचे 100 से अधिक श्रद्धालु,, - महापौर गीता अग्रवाल सहित देवास के भक्तों ने गंगा पूजन, कलश यात्रा और कथा श्रवण में लिया भाग

बद्रीनाथ धाम में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, देवास से पहुंचे 100 से अधिक श्रद्धालु,,
- महापौर गीता अग्रवाल सहित देवास के भक्तों ने गंगा पूजन, कलश यात्रा और कथा श्रवण में लिया भाग

देवास। पवित्र बद्रीनाथ धाम की दिव्य व आध्यात्मिक वादियों में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। कथा प्रारंभ होने से पहले श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से गंगा पूजन किया तथा भगवान बद्रीनाथ के दर्शन कर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके पश्चात कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत महापुराण को श्रद्धापूर्वक सिर पर धारण कर कथा स्थल तक पहुंचाया। भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच निकली कलश यात्रा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
इस धार्मिक आयोजन में देवास की महापौर गीता अग्रवाल, महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल सहित मां चामुंडा मां तुलजा भक्त मंडल के 100 से अधिक श्रद्धालु शामिल होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
कथा के प्रथम दिवस पर आचार्य देवराज शर्मा ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, सेवा, भक्ति और सदाचार का मार्ग दिखाने वाला दिव्य ज्ञान है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और समर्पण भाव से भागवत कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं तथा उसे आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
इस अवसर पर महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल ने कहा कि देवभूमि बद्रीनाथ जैसे पवित्र तीर्थ में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना अत्यंत सौभाग्य की बात है। तीर्थस्थल पर कथा सुनने का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है, जिससे श्रद्धालुओं को भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि ऐसी धार्मिक यात्राएं व्यक्ति के जीवन में संस्कार, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का संचार करती हैं।
आयोजकों ने बताया कि 23 जुलाई तक चलने वाली कथा के दौरान प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ प्राप्त करेंगे। इससे पूर्व भक्त मंडल ने हरिद्वार में गंगा स्नान कर पूजन किया व शाम की गंगाजी की आरती में शामिल हुए। इसके पश्चात केदारनाथ पहुंचकर द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक हिमालय की गोद में स्थित श्री केदारनाथ धाम में ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ के दर्शन व पूजन अर्चन किया।

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