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फेफड़ों के इलाज में क्रांति: अमलतास में 7 देशों के विशेषज्ञ दे रहे हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग

फेफड़ों के इलाज में क्रांति: अमलतास में 7 देशों के विशेषज्ञ दे रहे हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग

देवास: अमलतास यूनिवर्सिटी अमलतास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में आज, 03 जुलाई 2026 को चिकित्सा क्षेत्र का एक ऐतिहासिक आयोजन हो रहा है। "4th Bronchopulmonary World Conference 2026" के तहत मध्य भारत की पहली विशेष प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप आयोजित की जा रही है, जिसमें देश-विदेश के 150 से अधिक विषय विशेषज्ञ तथा 500 से अधिक डेलीगेट्स एवं मेडिकल फैकल्टी हिस्सा ले रहे हैं। 
इस अंतरराष्ट्रीय समागम में डॉ. महेंद्र के. बैनारा, डॉ. अपर जिंदल, डॉ. रवि डोसी, डॉ. अतुल सी. मेहता, डॉ. जोलिकर मोहम्मद मुन्नावर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. विनोद जोशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हैं। 
कॉन्फ्रेंस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रो. चांसलर डॉ. सलिल भार्गव ने कहा कि इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में विषय विशेषज्ञों द्वारा फेफड़ों की बारीकी से जांच और बीमारियों की सटीक पहचान के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह एडवांस ट्रेनिंग और तकनीक का आदान-प्रदान पूरे क्षेत्र सहित मध्य प्रदेश के मरीजों के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा, जिससे फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का इलाज समय पर और अधिक सटीकता से हो सकेगा। 
चांसलर डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि "मास्टर स्किल्स, एडवांस प्रैक्टिस, ट्रांसफॉर्म पेशेंट केयर" के ध्येय के साथ हो रही इस कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों की कार्यकुशलता बढ़ाना, क्लीनिकल निर्णय क्षमता को मजबूत करना और रिसर्च में नए आयाम स्थापित करना है। रजिस्ट्रार डॉ. अभय गुप्ता के अनुसार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी। 
इस दौरान श्वसन और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के अत्याधुनिक इलाज को लेकर 11 पैरेलल वर्कशॉप आयोजित की जा रही हैं, जिनमें रिजिड ब्रोंकोस्कोपी, मेडिकल थोराकोस्कोपी और इनड्वेलिंग प्लुरल कैथेटर (IPC), फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी और क्रायो एप्लीकेशन, एंडोब्रॉन्कियल अल्ट्रासाउंड (EBUS) हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, पल्मोनरी फंक्शन टेस्टिंग, स्लीप मेडिसिन, नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (NIV) और मैकेनिकल वेंटिलेशन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, गंभीर अस्थमा पर विशेष सत्र, पल्मोनोलॉजी में रिसर्च मेथड्स, NTEP-NCCP ट्यूबरकुलोसिस वर्कशॉप तथा पल्मोनरी तकनीशियन कार्यशाला शामिल हैं। 
कार्यशाला के मुख्य आकर्षण हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन एवं सिमुलेशन-आधारित लर्निंग और देश-विदेश की फैकल्टी के साथ जटिल केस स्टडीज पर सीधा संवाद हैं। इस अवसर पर चेयरमैन श्री मयंक राज सिंह भदौरिया ने कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रयास क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को और अधिक मजबूत एवं आधुनिक बनाएंगे।

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