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क्लाइमेट चेंज की आहटों के बीच देवास से आई सुखद खबर: अवैध उत्खनन से बर्बाद शंकरगढ़ पहाड़ी पर लौटी रंगत, नजर आई 'जंगली बिल्ली',, 7 वर्षों के अथक प्रयासों का दिखा परिणाम,,ग्रीन आर्मी, देवास के युवाओं, संस्थाओं, वन विभाग एवं पुलिस-प्रशासन की संयुक्त मेहनत रंग लाई

क्लाइमेट चेंज की आहटों के बीच देवास से आई सुखद खबर: अवैध उत्खनन से बर्बाद शंकरगढ़ पहाड़ी पर लौटी रंगत, नजर आई 'जंगली बिल्ली',,
 
7 वर्षों के अथक प्रयासों का दिखा परिणाम,,

ग्रीन आर्मी, देवास के युवाओं, संस्थाओं, वन विभाग एवं पुलिस-प्रशासन की संयुक्त मेहनत रंग लाई
देवास। वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संकट और क्लाइमेट चेंज की चिंताजनक खबरों के बीच मध्य प्रदेश के देवास जिले के शंकरगढ़ पहाड़ी से एक बेहद सुखद और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। कभी अवैध उत्खनन की वजह से अपना अस्तित्व खो चुकी शंकरगढ़ पहाड़ी पर अब प्रकृति का पुनर्जन्म (रेविल्डिंग) हो रहा है। हाल ही में इस पहाड़ी के वन क्षेत्र में एक जंगली बिल्ली' (जंगल कैट) को देखा गया है, जो इस बात का स्पष्ट प्रतीक है कि यहाँ का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) तेज़ी से स्वस्थ हो रहा है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की जानकारी ग्रीन आर्मी देवास के समरजीत जाधव ने दी।

7 वर्षों की अनवरत मेहनत और जन-भागीदारी

समरजीत जाधव ने बताया कि शंकरगढ़ पहाड़ी को पुनर्जीवित करना कोई एक दिन का काम नहीं था। पिछले सात वर्षों से लगातार देवास के युवाओं, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, वन विभाग और पुलिस-प्रशासन ने दिन-रात एक करके इस पहाड़ी के संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए काम किया है। जो पहाड़ी कभी अवैध उत्खनन के कारण पत्थरों का बंजर ढेर बन चुकी थी, आज वही पहाड़ी हरियाली की चादर ओढ़कर वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय स्थल बन रही है।

जंगल और जैव-विविधता के सुधार का प्रतीक

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, किसी क्षेत्र में जंगली बिल्ली या अन्य मांसाहारी जीवों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि वहाँ खाद्य श्रृंखला (फ़ूड चैन) और जैव-विविधता (बायोडाइवर्सिटी) पुनः स्थापित हो रही है। यदि कोई वन्यजीव किसी स्थान को अपना ठिकाना बनाता है, तो इसका अर्थ है कि वहाँ उसके लिए पर्याप्त भोजन, पानी और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध है।

पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश

ग्रीन आर्मी और देवास की अवाम के लिए यह घटना किसी उत्सव से कम नहीं है। यह सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर संकल्प लें, तो उजड़ चुके जंगलों को भी दोबारा आबाद किया जा सकता है। 

"शंकरगढ़ पहाड़ी पर जंगली बिल्ली का दिखना हम सभी के 7 साल के संघर्ष की जीत है। यह खबर साबित करती है कि हमारी प्रकृति दोबारा सांस ले रही है। हमारा लक्ष्य शंकरगढ़ पहाड़ी को इतना सुरक्षित और समृद्ध बनाना है कि यहाँ अन्य वन्यजीव भी स्वतंत्र रूप से फल-फूल सकें।" — समरजीत जाधव, ग्रीन आर्मी देवास
ग्रीन आर्मी देवास के बाद इंदौर और महु भी गठित हुई है जो पर्यावरण विचारकों चिंतको एवं जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले वाले युवाओं का समूह है ।

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