देवास; रज़ा फाउंडेशन के तत्वावधान में देवास के वरिष्ठ चित्रकार अफजल पठान के अमूर्त चित्र (मार्डन आर्ट) की प्रदर्शनी नई दिल्ली स्थित श्री धरणी कला दीर्घा, त्रिवेणी कला संगम में अरायोजित की गई जिसका उद्घाटन वरिष्ठ चिंतक व लेखक अशोक वाजपेई, वरिष्ठ चित्रकार अर्पिता सिंह, परमजीतसिंह, जतिनदास, कला समीक्षक व लेखक प्रयाग शुक्ल चित्रकार व (क्यूरेटर) अखिलेश वर्मा, सुमनसिंह, प्रकाश त्रिपाठी, हंस की संपादक शोभा अक्षरे धूमिल आर्ट गैलरी की डायरेक्टर सुनयना जैन, कला समिक्षक अरविंद कुमार, विनोद भारद्वाज, चित्रकार रफीक शाह, महावीर वर्मा, मुकेश बिजौले, रईस खान, विकास यादव (पूना),राजेश परमार, अमाखान, शादाब खान, अभिषेक उईके व अन्य पत्रकार कला प्रेमी छात्र छात्राएं उपस्थित थे।
इस अवसर पर श्री अफजल पर कलकत्ता के कला समीक्षक व लेखक सौमित्रा दास द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। रज़ा फाउंडेशन के न्यासी अध्यक्ष वाजपेई ने देवास के शास्त्रीय गायन व साहित्यिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जब देवास को रज्जबअली खां, अमानत अली खां एवं पं. कुमार गंधर्व व नईम के नाम से जाना जाता था। वो ही देवास अब चित्रकला के क्षेत्र में अफजल पठान के नाम से भारतीय समकालीन कला में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है ओर रज़ा फाउंडेशन अफजल जैसे वरिष्ठ चित्रकारों को जिनका नाम किन्हीं कारणों से चित्रकला जगत में नहीं जाना गया के चित्रों की प्रदर्शनी आयेाजित कर अपनी नैतिक जिम्मेदारी को पूरा करते हुए इनकी कला को सम्मान देकर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है व गौरवांवित महसूस कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह तो अफजल के चित्रों की प्रदर्शनी की शुरूआत है अभी तो कई पड़ाव बाकी है यह यात्रा अब नहीं रूकेगी।
इस अवसर पर श्री अफजल पर कलकत्ता के कला समीक्षक व लेखक सौमित्रा दास द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। रज़ा फाउंडेशन के न्यासी अध्यक्ष वाजपेई ने देवास के शास्त्रीय गायन व साहित्यिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जब देवास को रज्जबअली खां, अमानत अली खां एवं पं. कुमार गंधर्व व नईम के नाम से जाना जाता था। वो ही देवास अब चित्रकला के क्षेत्र में अफजल पठान के नाम से भारतीय समकालीन कला में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है ओर रज़ा फाउंडेशन अफजल जैसे वरिष्ठ चित्रकारों को जिनका नाम किन्हीं कारणों से चित्रकला जगत में नहीं जाना गया के चित्रों की प्रदर्शनी आयेाजित कर अपनी नैतिक जिम्मेदारी को पूरा करते हुए इनकी कला को सम्मान देकर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है व गौरवांवित महसूस कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह तो अफजल के चित्रों की प्रदर्शनी की शुरूआत है अभी तो कई पड़ाव बाकी है यह यात्रा अब नहीं रूकेगी।

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