देवास। संसार में जितने भी शरीर है सब पांच तत्व तीन गुण से बने हुए है। पांच तत्व गुण तीन अष्टांग कहिए ख़ास।आठव आठ मिले तो हुवा जगत प्रकाश। इसी से16 कलाएं, 16 तिथियां,12 राशि और सात वार 27 नक्षत्र,सारी नवग्रह गतिविधि हुई है। इसमें ही कायानगर को बांधा गया है। अहंकार अभिमान बिडारा घट का चौका कर उजियारा। अपने अहंकार अभिमान को हटाना पड़ेगा। जैसे आकाश से ओला बरसता है तो झाड़ के पत्ते आदि दूसरों को मिटा कर स्वयं भी मिट जाता है। इसलिए दया और प्रेम से उदय होना पड़ेगा। जिससे प्रेम प्यार की दुनिया बनेगी, फिर एक, दूसरे को हानि पहुंचाना बंद कर देंगे। यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने सदगुरु कबीर सर्वहारा प्रार्थना स्थली मंगल मार्ग टेकरी द्वारा आयोजित गुरु शिष्य संवाद गुरुवाणी पाठ में व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि संसार में जितने भी शरीर है सब में साहब ही बैठा हुवा है। काहू वस्तु का नाश न होई, करता में करतूत समाई। किसी भी वस्तु का नाश नहीं होता। करता में ही करतूत समायी हुई है। वाहन बदल देते हैं। शरीर को जला देते हैँ। वह अपना स्वभाव कैसे छोड़ेगा। पांच तत्व तीन गुण सब अल्पायु है। इसलिए अपने स्वयं के प्रकाश में आ जाओ, तो सारा भेद खत्म हो जाएगा। इस अहंकार में मत बैठो कि मैं तेरा हूं, कि तू मेरा है। यह तत्व गुण, पद पदार्थ किसी के नहीं होते। समय अनुसार बदल जाते हैँ। जो सत्य है, जीव उसको क्यों भ्रमित कर रहे हो। श्मशान में जलाकर राख कर दिया शरीर को। लेकिन जीव राख़ नही होता। मरने के बाद मटका फोड़ते हैं। इसका मतलब है कि देह रूपी मटका फुटा है, जीव तो अजर अमर है। जैसे मटके में पानी भरा हो मटका फूट जाता है, पानी थोड़ी। वैसे ही ट्यूब टायर में हवा भरी हो और अगर फट जाए तो हवा थोड़ी मर जाती। गुरु शिष्य संवाद के उजियारे में ही स्वयं को उपलब्ध हो पाओगे। संत इसे ही निज स्वरूप कहते हैं। इस दौरान सद्गुरु मंगल नाम साहेब को साध संगत द्वारा नारियल भेंट कर आशीर्वचन लिए। यह जानकारी सेवाक वीरेंद्र चौहान ने दी

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