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उपन्यास बड़ी विधा लेकिन उसे साधना बहुत कठिन - मनीष वैद्य,,'ढाई इंच पर दौड़ती ज़िंदगी' के विमोचन अवसर पर सार्थक चर्चा

उपन्यास बड़ी विधा लेकिन उसे साधना बहुत कठिन - मनीष वैद्य,,
'ढाई इंच पर दौड़ती ज़िंदगी' के विमोचन अवसर पर सार्थक चर्चा
देवास। उपन्यास निःसंदेह एक बड़ी विधा है लेकिन उसे साधना बहुत कठिन प्रक्रिया है।  सिर्फ कथ्य के स्तर पर नहीं, कथारस की रोचकता से पाठक को बार-बार चौंकाना पड़ता है. धार के उल्टा तैरना पड़ता है। तब कोई उपन्यास बड़ा बन पाता है। यह बात ख्यात कथाकार और चर्चित उपन्यास 'धूलकोट' के लेखक मनीष वैद्य ने यह बात संतोष सुपेकर के पहले उपन्यास 'ढाई इंच पर दौड़ती ज़िंदगी पर विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी बात रखते हुए कही। उन्होंने कहा कि यह उपन्यास हमारे संवेदनहीन होकर मशीन में बदलते जा रहे मनुष्य की पहचान और उसकी मनुष्यता को शिद्दत से रेखांकित करता है। प्रेमचन्द सृजन पीठ उज्जैन और सरल काव्यांजलि के तत्वावधान में आयोजित विमोचन प्रसंग में महत्त्वपूर्ण साहित्यकारों, लेखकों ने बात रखी. सारस्वत अतिथि के रूप में समालोचक एवं सम्राट विक्रमादित्य विवि के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि यह उपन्यास हिंदी कथा साहित्य में एक नई जमीन तोड़ता है क्योंकि आम आदमी और किसान पर तो बहुत लिखा गया है, पर लोको पायलट के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक संघर्ष पर यह एक दुर्लभ कार्य है। यह कृति रेलकर्मियों के माध्यम से मनुष्य की अविराम जिजीविषा और कभी न रुकने वाले कदमों का प्रवाहमय वृत्तांत है. उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रामाणिकता है।
प्रमुख अतिथि सम्राट विक्रमादित् विश्वविद्यालय कार्यपरिषद सदस्य राजेश सिंह कुशवाह ने कहा कि यह कृति लोको पायलट की कठिन सेवा और उनके रोमांचकारी विचित्र अनुभवों का निचोड़ है. अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध मालवी कवि डॉ. शिव चौरसिया ने कहा कि लेखक ने रेल की जिन्दगी में डूबकर , अपने सफ़र को शब्दों में इस उपन्यास में बखूबी व्यक्त किया है. विशेष अतिथि सुपरिचित कवि मनीष शर्मा ने कहा कि रेल का आकर्षण हमारे अवचेतन में रहता है मगर सुपेकर जी ने रेल का दूसरा पक्ष इस उपन्यास के जरिये रखा है। मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन देवास इकाई के सचिव हिमांशु कुमावत ने भी श्री सुपेकर के पहले उपन्यास के लिए उनको बधाई देते हुए लेखकीय सक्रियता और सतत रचनाशीलता से बेहतर कृतियाँ हिन्दी साहित्य को देने की बात कही। स्वागत भाषण देते हुए प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी ने कहा कि लघुकथाकार श्री सुपेकर अब उपन्यास लेखन के लिए भी जाने जायेंगे. आयोजन में डॉ. राजशेखर व्यास, डॉ.जगदीश शर्मा, डॉ. विश्वामित्र राय, डॉ. उर्मि शर्मा, डॉ. प्रीति जोशी, डॉ. रश्मि मोयदे, डॉ. पांखुरी वक्त, डॉ.वंदना गुप्ता, आशागंगा शिरढोणकर, राजेश ठाकुर, आशीष 'अश्क', संदीप सृजन, वीएस गहलोत, डॉ. नेत्रा रावणकर, सुगनचंद जैन, डॉ. संगीता कारलेकर, डॉ. मोहन बैरागी, एम. जी सुपेकर, भूषण जैन, अनिल पांचाल आदि उपस्थित रहे. संचालन मध्यप्रदेश लेखक संघ के सचिव डॉ. हरीशकुमार सिंह ने किया और आभार नितिन पोल ने व्यक्त किया।                       

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