दादी प्रकाश मणि ने विश्व कल्याण के लिए जीवन समर्पित कर दिया ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी,,
दादी प्रकाशमणि संपूर्ण विश्व में आध्यात्मिक क्रांति लाने वाली विशेष आत्मा थी ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी
देवास। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय कालानी बाग सेंटर पर संस्था की पूर्व प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि के पुण्य स्मृति दिवस पर ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी प्रेमलता दीदी क़ी अध्यक्षता में एवं समाजसेवी दीपक मन्नू लाल गर्ग, मां चामुंडा सेवा समिति संयोजक रामेश्वर जलोदिया के आतिथ्य में संस्था से जुड़े भाई बहनों गणमान्य नागरिकों द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। प्रेमलता दीदी ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि आध्यात्मिक जगत में प्रकाशित एक अद्वितीय सितारा है। दादीजी संपूर्ण विश्व में अध्यात्मिक क्रांति लाने वाली विशेष आत्मा थी। दादी जी अपनी वरदानी दृष्टि द्वारा हर एक आत्मा को अपने सत्य स्वरूप का साक्षात्कार कराने वाली साक्षात्कार मूर्ति थी। दादी ऐसी अनेक विशेषताओं से विभूषित थी। जैसा नाम था वैसा ही लाखों जीवों को अपने ज्ञान से प्रकाशित किया। सत्संग, नम्रता, सरलता, मधुरता जैसे भावों से परिपूर्ण थी। अपने प्रतिभाशाली नेतृत्व से ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रतिष्ठा को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अपना संपूर्ण जीवन दादी जी ने विश्व कल्याण में लगा दिया। सन 1922 में अखंड भारत के सिंध हैदराबाद में उनका जन्म हुआ था। दादी अपनी रूहानी खुशबू बिखेरती रही। बचपन से ही उन्हें मीरा जैसी बनने की इच्छा थी। 1936 में इस संस्था के संपर्क में आई। संस्था के संचालक ब्रह्मा बाबा से श्री कृष्ण स्वरूप का साक्षात्कार उन्हें हुआ और संस्था में जुड़ गई। जब उनकी उम्र मात्र 14 वर्ष की थी। तब संस्था में उनका पदार्पण हुआ। सर्व आत्माओं की सेवा में पूरा जीवन समर्पित कर दिया। दादी के आभामंडल में पवित्रता का सौंदर्य स्पष्ट रूप से झलकता था। सभी भाई बहन दादी जी के सेवा संकल्पों विनम्रता पवित्रता को अपने जीवन में आत्मसात करें। इस अवसर पर समाजसेवी दीपक मन्नू लाल गर्ग, रामेश्वर जरोदिया, नारायण व्यास, अनामिका गर्ग, दिनेश सावलिया, प्रेमलता चौहान, दुर्गा व्यास, ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी, मनीषा दीदी, अपुलश्री दीदी आदि संस्था से जुड़े भाई-बहन ने दादी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान ब्रह्म भोज का आयोजन भी किया गया. जिसमें सभी भाई बहनों ने महाप्रसादी ग्रहण की।

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