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स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई बेहतर स्वास्थ्य सुविधा से 27 दिन की जंग के बाद प्री मैच्योर शिशु को मिला नया जीवन, पूरी तरह से हुआ स्वस्थ्य शिशु
देवास, 09 सितंबर 2026/ जिले के खातेगांव के ग्राम कांकरिया निवासी श्रीमती अर्चना वसंताराम उईके का दिनांक 4 अगस्त 2026 को सामान्य प्रसव प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पुंजापुरा बागली में हुआ। प्रसव के दौरान श्रीमती अर्चना ने 36 हफ्ते के प्री मैच्योर शिशु को जन्म दिया। जन्म के समय शिशु को लो बर्थ वेट (2 किलो 200 ग्राम) एवं सांस में तकलीफ (रेस्पीरेट्ररी डिस्ट्रेस) के साथ बागली से जिला चिकित्सालय देवास रेफर किया गया। शिशु को देवास में एसएनसीयू में एडमिट किया गया। उसे सीपेप पर शिफ्ट कर एंटीबायोटिक और जीवक रक्षक दवायें दी गई। शुरूआत में शिशु को ऑक्सीजन लगाकर सपोर्टिव केयर पर रखा गया, लेकिन भर्ती के 4 घंटे में ही शिशु की स्थिति ज्यादा खराब होने लगी तो उसे वंटिलेटर पर रखा गया।
शिशु को झटके आने लगे और शिशु की आंतों से रक्त स्त्राव शुरू हो गया। इसी के साथ शिशु को निमोनिया भी हो गया। एंटीबायोटिक दवाईयां और बढ़ाई गई। रक्त स्त्राव ज्यादा होने के कारण प्लेटलेट्स लगाये गये। झटके की दवाईयां दी गई। एफएफपी भी लगया गया। 12 दिनों के बाद रक्त स्त्राव बंद होने पर शिशु को वेंटिलेटर से सीपेप पर शिफ्ट किया गया। 2 दिन सीपेप पर रखा जाकर 2 दिन ऑक्सीजन पर रखा गया। शिशु को नली से दूध शुरू किया गया। धीरे-धीरे शिशु को दिये जाने वाले दूध की मात्रा बढ़ाई गई। शिशु को एमएनसीयू में शिफ्ट किया गया। दिनांक 31 अगस्त 2026 को 27 दिन बाद शिशु को डिस्चार्ज किया गया। शिशु के पूर्णतः स्वस्थ होने पर उसके परिजन और एसएनसीयू टीम में बहुत प्रसन्नता है। इस सफलता के पीछे एसएनसीयू टीम की शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ वैशाली निगम, डॉ अनुज चाचरे, डॉ अश्विन सिंह, डॉ कार्तिक तिवारी एवं संपूर्ण नर्सिंग स्टाफ का सतत प्रयास और समर्पण रहा। इन सभी ने दिन-रात मेहनत कर शिशु को जीवन दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

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