गोगा नवमी पर दिखेगा वीर गोगादेव का बाल स्वरूप, मां बाछल की गोद में करेंगे अठखेलियां,,
देवास। क्षत्रिय चौहान परिवार में जन्मे लोक आराध्य एवं वीर योद्धा जाहरवीर गोगादेव जी की गोगा नवमी के अवसर पर निकलने वाले भव्य चल समारोह की तैयारियां शहर में जोर-शोर से चल रही हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन 5 सितंबर, शनिवार को शाम 7 बजे से परंपरानुसार विशाल चल समारोह धूमधाम के साथ निकाला जाएगा।vइस वर्ष चल समारोह में आकर्षण का केंद्र बनने जा रही झांकी में माता बाछल की गोद में बाल रूप में विराजित वीर गोगादेव अठखेलियां करते हुए नजर आएंगे। बाल स्वरूप में वीर गोगादेव की मनमोहक मुस्कान, चंचल भाव-भंगिमाएं और माता बाछल के वात्सल्य को झांकी के माध्यम से जीवंत रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। यह दृश्य श्रद्धा के साथ-साथ मातृत्व और बाल स्नेह की भावनाओं को भी अभिव्यक्त करेगा। विगत 31 वर्षों से विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक अवसरों पर आकर्षक झांकियां तथा गोगा नवमी पर पवित्र निशान तैयार करने वाले शहर के कलाकार पटेल गजू चांवरे इस झांकी को अपने साथी कलाकारों के साथ अंतिम रूप देने में जुटे हैं। चांवरे ने बताया कि वीर गोगादेव धर्म एवं राष्ट्र रक्षा के लिए आततायी हमलावर महमूद गजनवी से संघर्ष करने वाले तथा गुरु गोरखनाथ जी के प्रिय शिष्य के रूप में श्रद्धा से पूजे जाते हैं। उनके शौर्य और बाल स्वरूप की भावनात्मक छवि को इस बार झांकी में विशेष रूप से दर्शाया जा रहा है। झांकी को आकर्षक और जीवंत स्वरूप देने में कलाकार आलोक बंजारे, शानू चावरे, विशाल चावरे (दादा), जितेंद्र बाली, जितेंद्र खत्री, सुमित सांगते, तृप्त चावरे, डुग्गू चावरे एवं रुद्र बाली सहित अन्य सहयोगी कलाकार जुटे हुए हैं। कलाकारों के अनुसार एक झांकी को तैयार करने में करीब एक से डेढ़ माह का समय लग जाता है। इसके लिए कलाकार लगातार मेहनत कर बारीकियों को अंतिम रूप देते हैं। पटेल गजू चांवरे को उनकी कला के लिए अनेक बार सार्वजनिक रूप से शील्ड, शाल-श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया जा चुका है। गोगा नवमी के अवसर पर निकलने वाले चल समारोह में प्रतिवर्ष उनकी झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती हैं। कलाकार चांवरे ने समाजजनों एवं शहरवासियों से गोगा नवमी के पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में चल समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है।

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