रोजगार सप्ताह विशेष आज की नारी
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महिलाएं घर के साथ साथ बाहर की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं, सामान्यतः देखने में आता है कि अधिकांश महिलाएं कामकाजी हो गई है।
आमतौर पर नौकरी करने वाली महिलाएं अधिक लोगों के संपर्क में होती हैं, वो काम के दबाव को मैनेज करना सीख जाती हैं। इन्हें बाहरी दुनिया की समझ कुछ ज्यादा होती है। एक कामकाजी व्यक्ति को जो परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं, ये उनसे वाकिफ होती हैं। यदि परिवार किसी दुविधा में हो तो उसका हल भी प्रोफेशनल तरीके से दे सकती हैं।
ये सदैव आपको और आपके काम को बेहतर समझेगी।
अगर *परिवार में पत्नी भी नौकरी करने वाली हुई तो वह घर के साथ बाहर के काम को भी बेहतर ढंग से समझ पाएंगी। ऑफिस में काम का प्रेशर झेलकर जब पति घर आएंगे तब वो उनकी स्थिति समझ सकती है और आपसी समझ से घर के कामों में योगदान देने जैसी बातों पर अपने साथ बच्चों को राजी कर पाएगी*।इसके अलावा भी बैंक, घर के बिल आदि जैसे काम भी वो खुद ही कर सकती हैं।
वर्तमान समय की आवश्यकता भी है कि महिलाएं आत्म निर्भर हो। और हमारी संस्था हमें और हमसे जुड़ी महिलाओं को इस लक्ष्य प्राप्ति में सदैव सहायता प्रदान करती आई है।
भारत सरकार द्वारा समय-समय पर आयोजित रोजगार सप्ताह , रोजगार गारंटी शिविर और मेला इसके प्रत्यक्ष उदाहरण है।
ऋचा दिनेश तिवारी
लेखिका समाज सेविका

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