संत तुकाराम के अभंगों से गूंजा महाराष्ट्र समाज का गणेशोत्सव, प्राप्ति पुराणिक के सुमधुर गायन ने बांधा समां,,
राग कलावती में गणेश वंदना से हुआ संगीतमय संध्या का शुभारंभ, भक्ति गीतों और अभंगों पर झूमे श्रोता
देवास। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा प्रारंभ की गई सार्वजनिक गणेशोत्सव की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र समाज, देवास द्वारा आयोजित गणेशोत्सव के दूसरे दिन भक्ति, संगीत एवं संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। इस अवसर पर बनारस की सुप्रसिद्ध गायिका प्राप्ति पुराणिक ने अपने सुमधुर गायन से गणपति बप्पा के दरबार को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन स्मिता म्हाडगुत ने किया। शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, मां सरस्वती की प्रतिमा तथा राजकवि झोकरकरजी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र समाज के अध्यक्ष दीपक कर्पे ने की। विशेष अतिथि के रूप में निशिकांत झोकरकर उपस्थित रहे। निशिकांत झोकरकर का स्वागत न्यास अध्यक्ष संजय कोटस्थाने एवं दिलीप बाकरे ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया। सुश्री प्राप्ति पुराणिक का स्वागत महिला मंडल प्रमुख दिव्या गोटी ने किया तथा अध्यक्ष दीपक कर्पे ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। कार्यक्रम के निवेदक श्री पांडुरंग पुराणिक का स्वागत सदाशिव जोशी ने किया। प्रबंधक न्यास चिंतन ढवले का स्वागत शेखर धोडपकर ने तथा संगत कलाकार अंशुल राठौर का स्वागत विवेक जोशी ने किया। संगीतमय संध्या का आगाज सुश्री प्राप्ति पुराणिक ने राग कलावती में छोटे ख्याल के माध्यम से गणेश वंदना प्रस्तुत कर किया। इसके बाद “तूच सुखकर्ता, तूच दुखहर्ता...”, “वृंदावनी वेणु” गवळण तथा “गणपति झूल रहे...” गणेश झूला सहित अनेक मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। संत परंपरा को नमन करते हुए सुश्री प्राप्ति पुराणिक ने संत तुकाराम जी की रचना “विष्णुमय जग...” प्रस्तुत की। इसके साथ ही संत चोखामेळा का प्रसिद्ध अभंग “अबीर गुलाल...”, नाट्यगीत “वद जाऊ कुणाला...”, दादरा “तुम बिन लागे ना...”, भावगीत “सजण दारी उभा...” तथा प्रसिद्ध भक्ति गीत “कानडा राजा पंढरीचा...” ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का समापन भैरवी “अवघे गरजे पंढरपुर...” से हुआ। कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुति में सुश्री प्राप्ति पुराणिक ने लोकप्रिय हिंदी गीत “आजा सनम मधुर चांदनी में हम...” को संस्कृत में भी प्रस्तुत कर श्रोताओं को आनंदित किया। उनके गायन के साथ संगत कलाकार अंशुल राठौर एवं चिंतन ढवले ने अपने वादन से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उपस्थित संगीतप्रेमियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। महाराष्ट्र समाज के प्रवक्ता अमित बागलीकर ने बताया कि समाज द्वारा गणेशोत्सव के माध्यम से लोकमान्य तिलक की सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा के साथ महाराष्ट्र की समृद्ध संत परंपरा, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। गणपति बप्पा की आराधना के साथ संतों की वाणी और भक्ति संगीत का यह आयोजन समाज की सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करता है।
कार्यक्रम का निवेदन श्री पांडुरंग पुराणिक ने किया। अंत में प्रकाश कोर्डे ने आभार प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र समाज के गणेशोत्सव में आयोजित इस संगीतमय संध्या में गणपति भक्ति के साथ संत तुकाराम एवं संत परंपरा की आध्यात्मिक वाणी ने वातावरण को भक्तिरस से भर दिया।

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