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संगीत और नृत्य कला के सबसे अधिक सशक्त रूप हैं- जयंत माधव भिसे

संगीत और नृत्य कला के सबसे अधिक सशक्त रूप हैं- जयंत माधव भिसे
देवास। रंगमंच एवं एवं ललित कला के लिए समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती देवास द्वारा विभिन्न विधा कलाकारों के मध्य कला संवाद का आयोजन किया गया । कला संवाद में मुख्य वक्ता जयंत माधव भिसे, निदेशक -उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी अकादमी भोपाल थे । संस्था परिचय अध्यक्ष मनोरमा सोलंकी ने दिया। अतिथि व कला साधकों का परिचय प्रांत उपाध्यक्ष प्रकाश पवार ने दिया। जयंत माधव भिसे ने विभिन्न विधाओं के कला साधकों को एक मंच पर लाने के संस्कार भारती के सजीव प्रयासों की प्रशंसा की, आपने कहा कि संगीत और नृत्य कला के सबसे अधिक सशक्त रूप हैं तथा वे मानव के मनोभावों तथा अनुभवों की समूची स्थिति को सहज ही व्यक्त करते हैं, कला को नए लोक शैलियों से शक्ति मिलती रहती है और बदले में यह उन्हें नए विषयों की अंतर्वस्तु उपलब्ध कराता है। कला संवाद में डॉक्टर रमेश सोनी, चंद्रकला रघुवंशी, प्रफुल्ल सिंह गहलोत, कविता सिसोदिया, माधवानंद दुबे, कल्पना नाग, अशोक शर्मा, शशिकांत वझे, डॉक्टर रंगभरी कासिव, रोहित सोनी, रोहित गुर्जर, रमेश भावसार, मनोज भावसार, ललित अयाचित, दीपक कर्पे, उमेश जोशी ने सहभागिता की । कला संवाद के दौरान अमृत महोत्सव वर्ष के अंतर्गत गोवा को पुर्तगालियों से स्वतंत्र कराने में अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले अमर बलिदानी राजाभाऊ महाकाल की प्रतिमा के साथ परम पूज्य डॉ हेडगेवार जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की कलाभारती चित्रकला मूर्तिकला संस्थान में निर्मित प्रतिमाओं पर  माल्यार्पण करते हुए मूर्तिकार  लेखराज पवार के कला कौशल को सराहते हुए कहा कि इतनी सजीव प्रतिमा मुझे और कहीं देखने को नहीं मिली

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