आनन्दमार्ग के संस्थापक श्री श्री आनन्द मूर्तिजी का 101 वाँ जन्मदिन हर्षोल्लास से मनाया गया,
देवास: आनंद मार्ग प्रचारक संघ देवास के भुक्तिप्रधान दीपसिंह तंवर ने बताया कि आनंद नगर मेंआनन्दमार्ग के संस्थापक श्री श्री आनन्दमूर्ति जी का 101 वाँ जन्मोत्सव 16 मई वैशाखी पूर्णिमा को है। श्री श्री आनन्दमूर्ति जी का जन्म 1921 में ेंवैशाखी पूर्णिमा के दिन बिहार के जमालपुर में एक साधारण परिवार में हुआ था। परिवार का दायित्व निभाते हुए वे सामाजिक समस्याओं के कारण का विश्लेषण व उनके निदान ढूँढने में एवं लोगों को योग साधना आदि की शिक्षा देने में अपना समय देने लगे। सन1955 में उन्होंने आनन्द मार्ग प्रचारक संघ की स्थापना की। जिसका उद्देश्य है. आत्ममोक्षार्थंम जगतहिताय। श्री श्री आनन्दमूर्ति जी ने समझाया कि जिस जीवन मूल्य भौतिकवाद को वर्तमान मानव अपना रहे हैं उनके शारीरिक व मानसिक और ना ही आत्मिक विकास के लिए उपयुक्त है। अत: उन्होंने ऐसे समाज की स्थापना का संकल्प लिया जिसमें हर व्यक्ति को अपने सर्वांगीण विकास करते हुए अपने मूल्य को ऊपर उठाने का सुयोग प्राप्त हो। आचार्य ह्रदयेश ब्रह्मचारी ने बताया कि
उन्होंने कहा कि हर एक मनुष्य को शारीरिक , मानसिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में विकसित होने का अधिकार है और समाज का कर्तव्य है कि इस अधिकार को ठीक से स्वीकृति दे। वे कहते थे कि कोई भी घृणा योग्य नहीं, किसी को शैतान नहीं कह सकते। मनुष्य जब शैतान या पापी बनता है जब उपयुक्त परिचालन पथ निर्देशन का अभाव होता है वह अपने कुप्रवृत्तियों के कारण बुरा काम कर बैठता है यदि उनकी कुप्रवृत्तियों को सुप्रवृत्तियों की ओर ले जाया जाए तो वह शैतान नहीं रह जाएगा। हर एक मनुष्य देव शिशु है इस तत्व को मन में रखकर समाज की हर कर्म पद्धति पर विचार करना उचित होगा।
श्री श्री आनन्दमूर्ति जी का मानवता के लिए योगदान
मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए पुस्तकों की रचना, समन्वित चिकित्सा, यौगिक चिकित्सा, जीव मनोविज्ञान, आनन्दमार्ग चर्याचर्य खण्ड.। सभी वेदों का सार तत्व, मनुष्य के आध्यात्मिक विकास के लिए जीवन वेद चर्याचर्य1.2खण्ड सुभाषित संग्रह. 24 खण्ड, आनन्द वचनामृतम. 34 खण्ड, आनन्दसूत्रम, नमामिकृष्णसुन्दरम, नमरू शिवाय शान्ताय, कृष्णतत्त्व और गीतासार, भक्ति रस और कीत्र्तन महिमा, महाभारत की कथाएँ, तत्वकौमुदी, वेद में ब्रह्म विज्ञान, जीवन दीपिका इत्यादि। सामाजिक आर्थिक विकास के लिए पुस्तकें प्रऊत. 21 खण्ड, मानव समाज. 2 खण्ड, देश भक्तो के प्रति, आज की समस्याए अभिमत.9 खण्ड । भाषा विज्ञान पर आधारित पुस्तकें शब्द चयनिका.26 खण्ड, वर्ण विचित्रा.8खण्ड, वर्ण विज्ञान, अंग्रेजी व्याकरण, लघुनिरुक्त, शब्दकोष, प्रयोजनीय परिभाषा इत्यादि । विज्ञान पर आधारित पुस्तक . अनुजीवत। तन्त्र पर आधारित पुस्तकें .योग और तन्त्र, साधना ही तन्त्र ही साधना। कृषि पर आधारित पुस्तकें .कृषि कथाए चक्रनेमी। गुरूकुल शिक्षा पद्धति पर आधारित पुस्तक .नव्यमानवतावाद। जनमानस के कल्याण हेतु अष्टाक्षरी सिद्धमहामंत्र बाबा नाम केवलम, कीत्र्तन व विज्ञान संगत साधना पद्धति दिये । पीडि़त मानवता के कल्याण हेतु आनन्दमार्ग यूनिवर्सल रिलीफटीम, ग्लोबल, एवं जीव जन्तु, पशु-पक्षी, पेड़ पौधे एवं पर्यावरण की रक्षा हेतु पीकेप आदि संस्थाओं की स्थापना।
नारी जगत के उत्थान हेतु. नारी कल्याण विभाग बनाये जिसमें कई अलग. अलग शाखायें बनाये व कई अधिकार दिए। संगीत की दुनिया में योगदान- प्रभात संगीत एक नया घराना जिसमें 5018 गीतों का समूह जिसको आठ सालों में आठ भाषाओं में तथा विभिन्न रागरागिनियों पर स्वयं सुरबद्ध कर मानव समाज को अनुपम उपहार दिये। इस अवसर पर आचार्य अनिर्वानानंद अवधूत रेक्टर मास्टर एवं आचार्य सत्याश्रयानन्द धर्म प्रचार सचिव विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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